जम्मू। वन विभाग ने प्रदेश में वनों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुर वन अधिकारियों और कर्मियों को याद किया। पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में करीब सौ वन अधिकारियों और विभिन्न रैंकों के अधिकारियों ने शहादत पाई है। विभाग की ओर से शनिवार को मनाए गए राष्ट्रीय वन शहीद दिवस 2021 में शहीदों के परिजनों में आर्थिक राशि वितरित की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक और डा. मोहित गेरा ने वन शहीदों को समर्पित पुस्तक का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में वन अधिकारियों के कानूनी वारिसों और परिवार के सदस्यों को प्रत्येक को एक लाख रुपये के चेक वितरित किए गए। कर्तव्यों का पालन करते हुए गंभीर रूप से घायलों को 25-25 हजार रुपये के चेक दिए गए। विभाग ने पहली बार वन फ्रंटलाइन फोर्स के अधिकारियों को वर्ष 2020-21 के लिए वनरोपण, वन संरक्षण, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सीमांकन संबंधित कार्य क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया। बताया गया कि सरकार ने अग्रिम पंक्ति के वन अधिकारियों की सराहनीय सेवाओं के लिए राज्य पुरस्कार की घोषणा की है।
पीआरसीसीएफ गेरा ने राष्ट्रीय वन दिवस बिश्रनोई समुदाय के लगभग 360 लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने वर्ष 1730 को इस दिन राजस्थान के केजराली गांव में खेजरी पेड़ों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। यह दिन वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए देश भर में 1500 से अधिक वन अधिकारियों के सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। इस दौरान जम्मू कश्मीर की नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की पारिस्थितिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन अधिकारियों ने जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए संकल्प लिया।
शहीदों की याद में वन स्मारक बनेंगे
सर्वेश राय अतिरिक्त पीआर, सीसीएफ/सीईओ कैंपा ने बताया कि वन प्रशिक्षण स्कूलों सहित जम्मू और कश्मीर में शहीदों की याद में वन स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है। के रमेश कुमार सीसीएफ जम्मू ने कहा कि चुनौतीपूर्ण माहौल में वन स्टाफ काम कर रहा है।