उन्होंने धार्मिक नेताओं से अपील की, कि वे अपने अनुयायियों से स्वेच्छा से निजामुद्दीन की मरकज में शामिल हुए लोगों को अपने यात्रा इतिहास के बारे में बताने के लिए कहें। साथ ही आगामी त्योहारी सीजन के दौरान ‘स्टे एट होम-प्रेयर एट होम’ की प्रथा को अपनाएं। धार्मिक नेताओं ने प्रशासन को सहयोग देने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि किसी भी सामूहिक सभा से बचने के लिए सभी धार्मिक स्थानों को बंद कर दिया गया है। उन्होंने उपराज्यपाल से आवश्यक वस्तुओं की होम डिलीवरी और ग्रामीण और दूरदराज के लोगों तक मदद पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई। उपराज्यपाल ने प्रतिभागियों को आश्वासन दिया कि सरकार अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।