- तुलसी विवाह का शुभ समय शाम 5:29 से 7:53 बजे तक
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक भगवान विष्णु की सबसे प्रिय तुलसी का विवाह भगवान शालीग्राम से विवाह नक्षत्र काल में ही करने का शास्त्र विधान है। महंत रोहित शास्त्री का कहना है कि कार्तिक शुक्ल एकादशी व्रत वाले दिन प्रदोष काल में तुलसी विवाह व पूजन करने का विधान है। इस वर्ष कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि एक नवंबर शनिवार सुबह 9:12 बजे शुरू होकर अगले दिन रविवार सुबह 7:32 बजे समाप्त होगी।
हरिप्रबोधिनी एकादशी व्रत स्मार्त संप्रदाय (सामान्य गृहस्थी) एक नवंबर को व्रत रखें। वैष्णव संप्रदाय (सन्यासी) दो नवंबर को व्रत रखें। तुलसी विवाह दो नवंबर रविवार को होगा। इसका शुभ मुहूर्त शाम 5:29 से 7:53 बजे तक है। शास्त्री ने बताया इस दिन तुलसी के पौधे को सजाकर उसके चारों तरफ गन्ने का मंडप बनाना चाहिए। तुलसी पूजन करते समय (ऊं तुलस्यै नम:) मंत्र जाप करें। इस दिन गन्ना, आंवला और बेर का फल खाने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
इस दिन न तोड़ें तुलसी के पत्ते
शास्त्री ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार एकादशी रविवार के दिन और सूर्य ग्रहण व चंद्र ग्रहण के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। रात में और बिना उपयोग के भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। ऐसा करने से दोष लगता है।
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योगनिद्रा से जागते हैं भगवान विष्णु
तिरुपति बालाजी मंदिर के पुजारी अमित शुक्ला ने कहा कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाई जाने वाली प्रबोधिनी एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं। संपूर्ण सृष्टि में पुनः धर्म, पुण्य तथा मंगल की ऊर्जा का संचार होता है।