नव दुर्गा मंदिर शक्तिनगर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित श्री हरि कथा
जम्मू। दम तोड़ती मानवता के उत्थान का मार्ग केवल अध्यात्म के पास है। अध्यात्म को अपनाकर ही व्यक्ति जीवन को संस्कारों से सुसज्जित कर एक सभ्य मानव के रूप में खुद को परिवर्तित कर सकता हैं। ये बात आशुतोष महाराज की शिष्य स्वामी सुकर्मानंद ने नव दुर्गा मंदिर शक्ति नगर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित श्री हरि कथा के दौरान कही।
उन्होंने कहा - हमारा दुर्भाग्य है कि हम संस्कृति व संस्कारों को भूल रहे हैं। आज पश्चिमी संस्कृति के अनुसार जीवनशैली को अपना रहे हैं। यही कारण है कि बच्चे माता-पिता का सम्मान नहीं करते जबकि गुरु, माता-पिता का सम्मान करना संस्कृति हमें सिखाती है। जीवन में नैतिक मूल्यों के धारण के लिए भगवान श्री राम प्रेरणा देते हैं। दुर्भाग्य है कि हम संस्कृति व संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। समाज को संस्कृति के अनुसार नैतिक मूल्य व संस्कारों को अपनाने की आवश्यकता है। ब्यूरो