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आज नहीं जलेंगे रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले

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जम्मू। कोरोना महामारी के कारण इस बार सार्वजनिक स्थानों पर दशहरा नहीं मनाया जाएगा और न ही रावण, मेघनाद, कुंभकरण के पुतले जलाएंगे जाएंगे। शहर के प्रमुख परेड मैदान और दशहरा मैदान सूने पड़े हैं। हालांकि त्योहारी सीजन के चलते बाजारों में खरीदारी के लिए काफी भीड़ जुट रही है। शहर में जगह-जगह जाम की स्थिति बनी हुई है। कहीं भी सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
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संभाग में परेड मैदान पर मुख्य दशहरा समारोह में हर साल रावण मेघनाद और कुंभकरण के 55-60 फीट के पुतले खड़े दिखते थे, लेकिन इस बार मैदान खाली है। इन मैदानों में दशहरे के दिन खचाखच भीड़ रहती थी, लेकिन इस बार लोग मायूस है और घरों में रहकर दशहरा पर्व मनाएंगे। स्थानीय स्तर पर भी कहीं से पुतलों के दहन कार्यक्रम की सूचना नहीं है। एडीसी सतीश शर्मा ने बताया कि दशहरा कार्यक्रमों से जुड़े संगठनों से हुई बैठक में उन्होंने कोविड महामारी को देखते हुए स्वैच्छिक तौर पर पुतलों का दहन न करने पर सहमति जताई थी। जिला प्रशासन के पास भी पुतलों के निर्माण को लेकर कोई आवेदन नहीं आया है।
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पुतले बनाने वाले कारीगर मायूस, इस बार नहीं कर सकेंगे मां वैष्णो के दर्शन
दशहरे पर पुतले बनाने के लिए आने वाले कारीगरों को भी इस बार नुकसान उठाना पड़ा है। इस साल देशव्यापी स्तर पर लगभग सभी जगह दशहरे में पुतलों का दहन नहीं किया जा रहा है। जम्मू में हर साल 50-60 कारीगर पुतलों के निर्माण के लिए मेरठ से पहुंचते थे, लेकिन इस बार अनुमति न मिलने से वे नहीं आ पाए हैं। जम्मू में हर साल आने वाले मेरठ निवासी एवं ठेकेदार के बेटे मो. शकील ने बताया कि पुतलों का निर्माण न होने से उन्हें रोजगार नहीं मिल पाया है। जम्मू के गीता भवन में पूरे जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए पुतलों का निर्माण किया जाता था। इसमें मुसलिम और हिंदू भाई साथ में मिलकर पुतले तेयार करते थे। हर साल उन्हें जम्मू आने का इंतजार रहता था और वे दशहरे के बाद मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाते थे, लेकिन इस बार उन्हें मायूसी हुई है।
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