राठोर बताते हैं कि बच्चों ने सरदार भगत सिंह के जीवन और ''ऑपरेशन सिंदूर'' पर स्किट तैयार किए थे। रिहर्सल चल ही रही थी कि तभी अचानक हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट जैसी आवाज आई। मच्छल के लिए अक्सर गांव के ऊपर से विमान गुजरते हैं, क्योंकि वहां हेलीपैड बना है। राठोर के अनुसार, "मैंने सोचा कि शायद विमान उड़ रहा हो। तभी एक बच्चे ने बताया कि स्कूल के बाहर पानी आ गया है।
जब मैंने छत पर चढ़कर देखा तो होश उड़ गए। थोड़ी ही दूरी पर चीख-पुकार मची थी। चारों तरफ पानी और मलबे का ढेर लग चुका था। तभी बच्चों का नाम पुकारते हुए उनके मां-बाप का रोते-बिलखते स्कूल पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। जब उन्हें बताया गया कि सब सुरक्षित हैं, तब उनकी जान में जान आई। हुकमचंद ईश्वर का शुक्रिया अदा करते हैं कि उस दिन बच्चे स्वतंत्रता दिवस के लिए रिहर्सल कर रहे थे। अगर बच्चे घर पर होते तो न जाने क्या होता।
नाना के घर न जाती तो बच जाती अरुंधति
चिशोती की रहने वाली 11 साल की अरुंधति इस स्कूल में नहीं पढ़ती थी, लेकिन अपनी उम्र के दूसरे बच्चों के साथ वह स्कूल में रिहर्सल देखने आ जाती थी। हुकमचंद राठोर ने बताया कि 14 अगस्त को अरुंधति स्कूल न आकर अपने नाना-नानी के घर चली गई थी। सैलाब आया तो नाना के साथ ही अरुंधति भी बह गई। हुकमचंद बार-बार इस बात को दोहराते रहे कि अगर अरुंधति नाना के घर न गई होती तो शायद बच जाती।