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Red Fort Blast: हमले की कश्मीर कड़ी में अलकायदा का जुड़ाव खतरनाक, घाटी में आईएस की मौजूदगी भी बड़ी चिंता

Fri, 14 Aug 2026 06:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

घाटी में अल कायदा और इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों की मौजूदगी के संकेत बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहे हैं।
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सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में नवंबर 2025 में हुए कार बम धमाके की जांच ने अब जम्मू-कश्मीर में सक्रिय एक्यूआईएस आतंकी नेटवर्क की परतें भी खोली हैं। आतंकी हमले की अहम कड़ियां अल कायदा के भारतीय उपमहाद्वीप विंग तक पहुंचने से सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच और अब तक सामने आए दस्तावेज के अनुसार हमले की साजिश में शामिल आरोपी जम्मू-कश्मीर से जुड़े थे। इनमें डॉक्टर, कथित ओवरग्राउंड वर्कर और आतंकी नेटवर्क को लॉजिस्टिक मदद पहुंचाने वाले भी हैं। अब इसमें अलकायदा का खतरनाक जुड़ाव सामने आना पूरे प्रदेश के लिए सामान्य नहीं माना जा रहा।

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पुलवामा, अनंतनाग और शोपियां से जुड़ी रहीं अहम कड़ियां
एनआईए ने नवंबर 2025 में डॉ. मुजम्मिल शकील गनई निवासी पुलवामा, डॉ. आदिल अहमद राथर निवासी अनंतनाग और मुफ्ती इरफान अहमद वागे निवासी शोपियां समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया। एजेंसी ने इन आरोपियों को हमले की साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया। हमले की मुख्य कड़ी डॉ. उमर उन नबी से जुड़ी थी, जिसे एनआईए ने मुख्य हमलावर बताया। जांच में सामने आया कि वह भी इस आतंकी नेटवर्क का हिस्सा था

जम्मू-कश्मीर में मिल चुकी है अलकायदा व आईएसआईएस की मौजूदगी
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठनों के खिलाफ भारतीय सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर बढ़ते दबाव के बीच एक नया खतरा सामने आया है। घाटी में अल कायदा और इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों की मौजूदगी के संकेत बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद के अनुसार इन संगठनों की विचारधारा जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहे हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान समर्थित संगठनों से अलग है। अलकायदा और आईएसआईएस का एजेंडा स्थानीय राजनीतिक मांगों से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर कट्टर इस्लामी विचारधारा को स्थापित करने पर केंद्रित रहा है।
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2017 में बना अंसार गजवत-उल-हिंद से अलकायदा की दस्तक
अलकायदा ने 2017 में जम्मू-कश्मीर के लिए अपना अलग संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीएच) बनाया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर आतंकी बने जाकिर मूसा को इसका प्रमुख बनाया। मूसा ने कश्मीर में सक्रिय पुराने आतंकी संगठनों की विचारधारा से अलग रुख अपनाते हुए कहा था कि उसका लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना या स्वतंत्र राष्ट्र बनाना नहीं, बल्कि शरिया लागू करना है। मूसा की मई 2019 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत हो गई। उसके बाद भी एजीएच की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुईं। संगठन ने नए नेतृत्व की घोषणा की और अपने नेटवर्क को बनाए रखने की कोशिश जारी रखी।

अलकायदा की कश्मीर में पुरानी दिलचस्पी
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अलकायदा ने 1996 में ही जम्मू-कश्मीर और असम को अपने निशाने पर लिया था। हालांकि लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर में उसकी सक्रियता के ठोस प्रमाण नहीं मिले। 2002-3 में अमेरिका ने कश्मीर में अलकायदा से जुड़े आतंकियों की मौजूदगी की आशंका जताई थी। 2014 में अलकायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने अलकायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट की स्थापना की। इसके बाद संगठन ने जम्मू-कश्मीर में भर्ती और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार की कोशिशें तेज कीं। सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को प्रभावित करने और ‘गजवा-ए-हिंद’ की अवधारणा को प्रचारित करने के प्रयास भी किए गए।

संख्या से ज्यादा विचारधारा की चिंता
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में अलकायदा का खतरा केवल उसके सक्रिय आतंकियों की संख्या से नहीं आंका जा सकता। चिंता इस बात की है कि अगर उसकी कट्टर विचारधारा घाटी के युवाओं को प्रभावित करने में सफल होती है, तो यह मौजूदा आतंकी ढांचे से अलग एक नया खतरा पैदा कर सकती है।

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