बिजली तंत्र की दुर्दशा से जूझ रहे जम्मू संभाग को आरएपीडीआपी के तहत आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सुधारने की दिशा में कदम तो बढ़ा दिए गए हैं, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी कोई बेहतर नतीजे सामने नहीं आए हैं।
देशभर में लागू होने के बाद आरएपीडीआरपी स्कीम को बिजली तंत्र में सुधार का एक नायाब तरीका मानकर राज्य के 30 शहरों और कसबों में भी लागू करने की कवायद जारी है। इसी कड़ी में जम्मू संभाग के 11 बड़े शहरों और कसबों में भी आरएपीडीआपी को लागू किया जाना है।
जम्मू संभाग में आरएपीडीआपी के लिए 781.91 करोड़ और स्काडा के लिए 27.69 करोड़ की राशि मंजूर की जा चुकी है। कुल लागत का अनुमान 809.67 करोड़ आंका जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस स्कीम के लागू होने से ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लासेज को कम करने में सहायता होगी, जो इस समय अधिकतर मीटर्ड और अनमीटर्ड ट्रांसफार्मरों पर 60 से 70 प्रतिशत के लगभग हैं।
इस जिलों को मिलेगा इसका फायदा
जम्मू संभाग में जम्मू शहर, अखनूर, भद्रवाह, डोडा, कठुआ, उधमपुर, राजौरी, पुंछ, सांबा और पायलेट कसबे के रूप में आरएस पुरा कसबे को पूरा किया जाएगा।
इस योजना को दस हजार से अधिक आबादी वाले शहरों और कसबों में लागू करने की योजना है। वर्तमान में पावर फाइनेंस कारपोरेशन इस योजना को राज्य में लागू करने पर पूरे नजर बनाए हुए है।
फिलहाल जम्मू शहर में इरकान इंटरनेशनल ने काम शुरू कर दिया है, जबकि कठुआ सहित सांबा में इएमसी कोलकाता द्वारा इस काम को शुरू किया जाना बाकी है।
कठुआ शहर में इस योजना को अमल में लाने के लिए 63 करोड़ की लागत आएगी। सूत्रों की मानें तो कठुआ और सांबा में काम करने वाली कंपनी के पास कश्मीर संभाग में ज्यादा काम मिलने के चलते इस योजना में विलंब किया जा रहा है। बिजली विभाग के उच्च अधिकारी ने बताया कि सितंबर माह में कठुआ में इस योजना पर काम शुरू किया जाएगा।
क्या है आरएपीडीआरपी?
11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत आरएपीडीआरपी को सेंट्रल सेक्टर स्कीम के तहत लागू करवाया जा रहा है। इसमें निरंतर हानि को रोकने की शर्तों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 13,763 उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली की सुविधाएं मुहैया करवाने के लक्ष्य से आएपीडीआपी को लागू करने की योजना है।
शहर में बिजली व्यवस्था के सुधार और विकास के लिए 63.32 करोड़ की लागत का अनुमान है। हालांकि इस योजना को दिसंबर 2014 तक पूरा किया जाना था, लेकिन किन्हीं कारणों से यह योजना अभी तक कठुआ में शुरू नहीं पाई है।
इस योजना के तहत सघन आबादी वाले शहर में बड़े ट्रांसफार्मरों को हटाकर 25 और 16 केवीए के छोटे ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इसके साथ ही ओवरहेड कंडक्टर (बिजली के तारों) को बदलकर एरियल बंच केबल के इस्तेमाल की योजना है। इससे बिजली चोरी पर लगाम लगाना संभव हो सकेगा।
कुछ क्षेत्रों में पुराने तारों को बदलकर नए तार बिछाने की योजना है। इस प्रक्रिया से विभाग को मौजूदा स्थिति में हो रहे लगभग 70 प्रतिशत ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लासेज पर नकेल कसना भी संभव होगा।
आएपीडीआरपी के नियम और शर्तों में इन लासेज को सात वर्षों में घटाकर 15 प्रतिशत तक लाने की योजना है। इस योजना के लागू होने से प्रति मोहल्ला ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाएंगे। बिजली चोरी रोकने में ट्रांसफार्मर पर लगे मीटर सहायक होंगे।