उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सईद वसीम रिजवी ने कहा है कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले में समझौता ही एकमात्र हल है। शिया वक्फ बोर्ड ने सुलह और बातचीत से मामले को हल करने की तरफ कदम बढ़ाए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी समेत हिंदू संगठनों जिसमें आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद, निरमोही अखाड़ा व अन्य संबंधित पक्षकारों से बातचीत हुई है और इस पर सहमति बन गई है कि श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर का निर्माण हो।
साथ ही पास के मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाई जाए। भव्य मस्जिद के निर्माण में हिंदू संगठनों ने भी सहयोग देने की पेशकश की है। इस समझौते के बारे में देश भर के मुस्लिम समुदाय के लोगों को राजी करने की कवायद के तहत वह जम्मू पहुंचे हैं। जम्मू में पत्रकारों से बातचीत में रिजवी ने कहा कि समझौते में केवल सूनी वक्फ बोर्ड व उससे जुड़े कुछ पक्षकार बाधा बने हुए हैं और बातचीत के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। यह सब पाकिस्तान के इशारे पर हो रहा है।
पाकिस्तान की तरफ से इन लोगों को फंडिंग होती है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि भारत में शांति से वर्षों पुराना मसला हल हो जाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या में विवादित मस्जिद का निर्माण मीर बाकी ने वर्ष 1528 में कराया था और 1946 तक इस मस्जिद के सारे मामले शिया वक्फ बोर्ड ही देखता रहा। 1944 में मस्जिद का पंजीकरण सूनी वक्फ बोर्ड ने कर लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में सूनी वक्फ बोर्ड के पंजीकरण को रद्द कर दिया।