पुंछ के मेंढर सब डिवीजन में चार अलग-अलग जगहों पर एनआईए की कई टीमें सुरक्षाबलों के साथ पहुंची। पुंछ जिले के गुरसाई गांव के दो लोगों पर हमलावरों को पनाह देने के मामले में एनआईए पहले ही मामला दर्ज कर चुकी है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार को पुंछ में चार अलग-अलग जगहों पर रेड की। राजोरी के ढांगरी में इस साल के पहले दिन हुए आतंकी हमले की जांच के सिलसिले में ये छापेमारी की गई। इस दौरान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के आवासों की तलाशी ली गई।
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अधिकारियों ने बताया कि जिले के मेंढर सब डिवीजन में चार अलग-अलग जगहों पर एनआईए की कई टीमें सुरक्षाबलों के साथ पहुंची। मेंढर के गुरसाई गांव के दो लोगों पर हमलावरों को पनाह देने के मामले में एनआईए पहले ही मामला दर्ज कर चुकी है।
एजेंसी ने मौके से कई डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों को जब्त किया है। अधिकारियों ने कहा कि साजिश का पर्दाफाश करने के लिए आगे की जांच की जा रही है।
इस मामले में एजेंसी दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। निसार अहमद उर्फ हाजी निसार और मुश्ताक हुसैन को एनआईए ने 31 अगस्त को पकड़ा गया था। दोनों वर्तमान में सेंट्रल जेल, कोट भलवाल, जम्मू में बंद हैं। एनआईए द्वारा जुटाए गए इनपुट के साथ-साथ इन दोनों व्यक्तियों द्वारा किए गए खुलासे को लेकर आज की छापेमारी हुई।
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एनआईए की जांच में पता चला है कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने जानलेवा हमला करने वाले आतंकियों को पनाह दी थी। उन्होंने दो महीने से अधिक समय तक आतंकवादियों को रसद सहायता प्रदान की और उन्हें अपने द्वारा बनाए गए ठिकाने में आश्रय दिया। जांच के अनुसार, दोनों पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आकाओं सैफुल्ला उर्फ साजिद जट्ट, अबू कतल उर्फ कतल सिंधी और मोहम्मद कासिम के निर्देश पर काम कर रहे थे।