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राजनाथ-मुफ्ती मुलाकात में पकी नई सियासी खिचड़ी

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रियासत के विधानसभा चुनाव में मिशन 44 प्लस के तहत भाजपा ने चुनाव पूर्व किसी भी गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया है, लेकिन चुनाव बाद समझौते के लिए अभी से पृष्ठभूमि तैयार की जाने लगी है।
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भाजपा ने सभी विकल्प खुले रखे हैं। रियासत के सभी प्रमुख दल नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी, भाजपा और कांग्रेस अपने बूते सरकार बनाने के दावे कर रहे हैं, लेकिन, परदे के पीछे समीकरणों की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

पीडीपी के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की दिल्ली में मुलाकात के बाद चर्चाओं का दौर गरम है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में जम्मू कश्मीर में नई सरकार बनाने की स्थितियों पर भी चर्चा हुई।
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भाजपा और पीडीपी चुनाव में आमने-सामने

पीडीपी के सूत्र बताते हैं कि राजनाथ और मुफ्ती की मुलाकात में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी शामिल थे। इस दौरान पीडीपी संरक्षक ने रियासत में वोटों के ध्रुवीकरण के खतरे से आगाह किया। मुफ्ती केंद्रीय गृह मंत्री और रियासत के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

इस अनुभव के बूते सीएम की कुर्सी के लिए उनका मजबूत दावा भी भाजपा नेताओं के सामने रखा गया है। फिलहाल भाजपा और पीडीपी दोनों दल अकेले दम पर चुनाव में आमने-सामने हैं।

लोकसभा चुनाव में तीन-तीन सीटें हासिल करने के बाद दोनों दलों का उत्साह चरम पर है। पीडीपी ने कश्मीर की सभी तीन सीटों पर कब्जा जमाया था जबकि भाजपा ने जम्मू और लद्दाख में फतह हासिल की थी।

नेकां से भी हो सकता है भाजपा का मिलन

पीडीपी की ओर से 2002 के चुनाव के बाद कांग्रेस की उदारता की उदाहरण रखा जा रहा है जब पीडीपी को सिर्फ 16 सीटें मिलीं थीं और कांग्रेस ने 21 सीटें हासिल की थीं। तब पहले पीडीपी को ढाई साल तक सरकार चलाने का मौका मिला था।

मुफ्ती मुख्यमंत्री बने और बाद के ढाई साल के लिए कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद को यह मौका मिला था। उधर, भाजपा की कोशिश अधिक से अधिक सीटें हासिल करने की है और चुनाव बाद की स्थितियों के लिए छोटे दलों से भी बात चल रही है।

पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन के साथ भाजपा महासचिव जेपी नड्डा की मुलाकात से सियासी हलचल बढ़ी थी। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की बाढ़ राहत मामले में तारीफ की और उमर ने मोदी की श्रीनगर में दिवाली को ऐतिहासिक निर्णय बताया, तब भी चर्चाएं गरम हुईं थी।
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'भाजपा को जम्मू और लद्दाख से ज्यादा उम्मीदें'

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा अपना मुख्य मुकाबला भाजपा से बता चुकी हैं। पीडीपी कश्मीर संभाग में बढ़त का दावा कर रही है और भाजपा को जम्मू और लद्दाख से ज्यादा उम्मीदें हैं।

ऐसे में मुफ्ती और राजनाथ की ताजा मुलाकात को चुनाव बाद के सियासी समीकरणों के लिए पृष्ठभूमि तैयार करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
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