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जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने निकाली विरोध रैली

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सांबा। जल शक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने लंबित मांगों के समर्थन में पीएचई यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले विरोध रैली निकाली। रैली पीएचई सब डिवीजन से शुरू हुई और विभिन्न स्थानों से गुजरते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंची। विरोध रैली में बड़ी संख्या में अस्थायी कर्मचारी शामिल रहे।
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उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उन्हें नियमित करने की नीति बनाने में विफल रही है। आज तक दिहाड़ी मजदूर ईमानदारी से काम कर रहे हैं और अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। सरकार ने उन्हें नियमित करने की कोई नीति नहीं बनाई। चुनाव से पहले केंद्र और राज्य सरकार ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार सभी मोर्चों पर पूरी तरह विफल रही है। इतना ही नहीं उन्हें 70 माह से उनके वेतन को जारी नहीं किया गया है। उनका न्यूनतम वेतन उन्हें दिल्ली यूटी बेस के लिए देना चाहिए। क्योंकि राज्य यूटी में परिवर्तित हो गया है। वही लाभ स्थायी कर्मचारियों को दिया गया है, लेकिन दैनिक वेतन भोगियों को समान लाभ नहीं दिया गया है। भीषण गर्मी में अस्थायी कर्मचारी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं, लेकिन सरकार उनके लिए कोई नीति नहीं बना रही है। उन्होंने कहा कि वे वर्षों से जल शक्ति विभाग में सेवा दे रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी समस्याओं को नहीं सुना। इससे उनके परिवार को भी परेशानी हो रही है। इसका खामियाजा उनके बच्चों को भी भुगतना पड़ रहा है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर खामोश है।
रवि हंस सदस्य पीएचई कर्मचारी यूनाइटेड फ्रंट ने कहा कि जल शक्ति विभाग के दैनिक वेतन भोगी बारह दिन से हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार उन्हें नियमित करने में विफल है। 1994 के बाद से आज तक किसी भी अस्थायी मजदूर को शासन द्वारा नियमित नहीं किया गया है। बिना पैसे के हम बच्चों का पालन-पोषण कैसे करेंगे। यदि राज्य को यूटी में परिवर्तित कर दिया गया है तो सरकार को दिल्ली यूटी बेस को उनका वेतन क्यों नहीं दिया जाता है।
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