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Jammu News: रेलहेड शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में अवैध अमन आर्म्स कंपनी सील, पुंछ-किश्तवाड़ के लाइसेंस बरामद

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कार्रवाई के बाद गन हाउस के शटर में सरकारी ताला। प्रशासन - फोटो : samvad
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जम्मू। सबसे पॉश और व्यस्त इलाकों में शुमार रेलहेड शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में अवैध रूप से संचालित हो रहे अमन आर्म्स कंपनी (गन हाउस) का प्रशासन ने भंडाफोड़ किया है। टीम ने पुलिस के साथ छापा मारकर दुकान को सील कर दिया। जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि गन हाउस का डीलरशिप लाइसेंस साल 2024 में ही खत्म हो चुका था। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से हथियारों का अवैध कारोबार किया जा रहा था।
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तहसीलदार बाहू राजू सांब्याल और तहसीलदार मुख्यालय मोना चालोत्रा के नेतृत्व में टीम ने दस्तावेज को कब्जे में लिया। रिकॉर्ड की जांच की तो अधिकारी भी कारनामे देखकर दंग रह गए। दुकान से बड़ी गिनती में ऐसे शस्त्र लाइसेंस और निजी दस्तावेज बरामद हुए हैं जिनका अंतिम नवीनीकरण (रिन्यूअल) पुंछ, किश्तवाड़, गांदरबल और पुलवामा जैसे जिलों से कराया गया था। पता चला है कि गन हाउस संचालक लाइसेंसों को नवीनीकरण कराने के बहाने भोले भाले ग्राहकों से अपने पास रख लेता था। बाद में वह असली दस्तावेज को लौटाने से इनकार कर देता था। इसके एवज में ग्राहकों से मोटी उगाही का खेल चल रहा था। डीसी राकेश मिन्हास ने आरोपी गन हाउस संचालक के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।



दो साल बाद टूटी प्रशासन की नींद

सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील इलाके में बिना वैध लाइसेंस के दो साल से गन हाउस चल रहा था। जब प्रशासन की नींद टूटी तो गड़बड़झाला सामने आया। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह जांचना है कि इस समयावधि के दौरान अवैध गन हाउस से कहां, किस-किस को शस्त्र और कारतूस उपलब्ध कराए गए हैं। फिलहाल डीसी ने जम्मू के सभी गन हाउसों के रिकॉर्ड को री-चेक करने का आदेश जारी किया है।
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एजेंसियां अलर्ट, इनपुट जुटाने शुरू

जम्मू-कश्मीर का सुरक्षा और खुफिया तंत्र चौकन्ना और अलर्ट मोड पर आ गया है। साधारण गन हाउस की आड़ में चल रहे अवैध खेल के पीछे बड़ी साठगांठ या राष्ट्रविरोधी तत्वों के शामिल होन की आशंका से अभी इनकार नहीं किया जा सकता है। प्रशासनिक कार्रवाई के तुरंत बाद ही केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और पुलिस की स्पेशल विंग ने मामले से जुड़े इनपुट जुटाने शुरू कर दिए हैं। एजेंसियों को अंदेशा है कि जब सालों से दुकान का वैध लाइसेंस ही नहीं था तो कहीं इसका इस्तेमाल हथियारों की अवैध सप्लाई करने या संदिग्ध लोगों को पहचान पत्र मुहैया कराने में तो नहीं किया जा रहा था। पुंछ और किश्तवाड़ जैसे इलाके कुछ समय से सुरक्षा के नजर से बेहद संवेदनशील रहे हैं।



खंगाले जा रहे रिकॉर्ड

एजेंसियां अब विशेष रूप से इस बात की तफ्तीश में जुट गई हैं कि क्या इन जब्त किए गए लाइसेंसों का इस्तेमाल फर्जी तरीके से हथियार या भारी मात्रा में कारतूस खरीदने के लिए तो नहीं किया गया था? जम्मू से लेकर घाटी के ऑनलाइन रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जब डीसी राकेश मिन्हास का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन और मैसेज किया गया तो कोई जवाब नहीं मिल सका।
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