कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी मंगलवार को कश्मीर घाटी के गांदरबल के तुलमुल्ला स्थित माता खीर भवानी दुर्गा मंदिर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मंदिर में माथा टेक कर मां का आशीर्वाद लिया और देश की एकता व समृद्धि की मंगलकामना की। इसके बाद राहुल गांधी श्रीनगर स्थित हजरतबल दरगाह में पहुंचे और देश में अमन और शांति की दुआ की। इस दरगाह के लिए घाटी में मुसलमानों के बीच गहरा सम्मान है।
सोमवार को कन्याकुमारी से शुरू हुई भारत जोड़ो यात्रा का श्रीनगर में समापन हुआ। समापन समारोह को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता गांधी ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा का उद्देश्य भारत के उदार और धर्मनिरपेक्ष लोकाचार को बचाना है। उन्होंने यह यात्रा अपने लिए या कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि देश के लोगों के लिए की है।
Rahul Gandh and Priyanka Gandhi
- फोटो : सोशल मीडिया
कश्मीरी पंडितों का प्रसिद्ध मंदिर है खीर भवानी मंदिर
यह कश्मीरी पंडितों का प्रसिद्ध मंदिर है। मध्य कश्मीर में श्रीनगर से पूर्व दिशा में 14 किलोमीटर दूर गांदरबल जिले के तुलमुला में यह मंदिर स्थित है। घाटी में बाबा अमरनाथ के बाद खीर भवानी मंदिर की मान्यता सबसे अधिक है। इस मेले से कश्मीरी पंडितों की कई यादें जुड़ी हैं, जिसके चलते कश्मीरी पंडितों को इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। देश व विदेशों में बसे कश्मीरी पंडित इस मेले में शामिल होने के लिए हर साल पहुंचते हैं।
1912 में हुआ था मंदिर का निर्माण, जानें मान्यता
इस मंदिर का निर्माण 1912 में महाराजा प्रताप सिंह ने कराया था। बाद में महाराजा हरी सिंह ने जीर्णोद्धार कराया। मान्यता है कि रावण की भक्ति से प्रसन्न होकर मां राज्ञा माता ( खीर भवानी या राग्याना देवी) ने रावण को दर्शन दिए थे। जिसके बाद रावण ने उनकी स्थापना श्रीलंका की कुलदेवी के रूप में की थी। कुछ समय बाद रावण के व्यवहार और बुरे कर्मों के चलते देवी उससे रुष्ट हो गईं और श्रीलंका से जाने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद जब भगवान राम ने रावण का वध कर दिया तो उन्होंने भगवान हनुमान को यह काम दिया कि वह देवी के लिए उनका पसंदीदा स्थान चुनें और स्थापित करें। इस पर देवी ने कश्मीर के तुलमुला को चुना। माना जाता है कि वनवास के दौरान राम राग्याना माता की आराधना करते थे तो मां राज्ञा माता को रागिनी कुंड में स्थापित किया गया।
मंदिर के कुंड के पानी का बदल जाता है रंग
कहा जाता है कि खीर भवानी माता किसी भी अनहोनी का संकेत पहले ही दे देती हैं। मंदिर के कुंड यानी चश्मे के पानी का रंग बदल जाता है। खीर भवानी के रंग परिवर्तन का जिक्र आइने अकबरी में भी है। हर साल पूजा से पहले मंदिर के कुंड में दूध और खीर डालते हैं। खीर का मतलब दूध और भवानी का मतलब भविष्यवाणी है। यहां के मुसलमान और पंडित दोनों इस विचार से सहमत हैं। यहां के मुस्लिमों का मानना है कि, ये उनके लिए तीर्थ है और उनकी मुराद पूरी होती है।