चौंकाने वाला मामला कुंजवानी बाईपास के पास जम्मू साइकियाट्रिक क्लीनिक का है। यहां 22 से 26 मई के बीच ब्यूप्रेनॉर्फिन और नालोक्सोन की 38,580 गोलियों की बिक्री दर्ज की गई। इनमें 25 मई को ही 10,120 गोलियों की बिक्री का रिकॉर्ड मिला। इसका इस्तेमाल नशे की लत के इलाज में होता है। यहां मनोचिकित्सक डॉ. खुशबू हर्ष चौहान को प्रदेश में इलाज करने की अनुमति भी रद्द कर दी गई। इस क्लिनिक में सितंबर 2025 से 2026 तक एक ही दवा आपूर्तिकर्ता से ब्यूप्रेनॉर्फिन-नालोक्सोन की करीब 25 लाख गोलियां खरीदने और बांटे जाने का रिकॉर्ड मिला। बाड़ी ब्राह्मणा में रेलवे चौक के पास डिवाइन साइकियाट्रिक ओपीडी क्लीनिक एक डॉक्टर के संचालन वाले डे-केयर क्लीनिक के रूप में पंजीकृत था। बाहर नशामुक्ति केंद्र का बोर्ड लगा था, लेकिन जरूरी अनुमति ही नहीं थी। 13 अगस्त 2025 को जांच के दौरान क्लीनिक से जुड़े डॉक्टर आरिफुद्दीन अहमद नहीं मिले।
वेव मॉल के केंद्र में 36 हजार गोलियों का रिकॉर्ड, डॉक्टर की योग्यता पर सवाल
जम्मू के वेव मॉल स्थित डिवाइन डी-एडिक्शन सेंटर से जुड़े मामले में डॉ. सैयद मतीन की विशेषज्ञता और दवाओं की बिक्री पर सवाल उठे। 30 जून 2025 के एक बिल में डॉ. मतीन के पंजीकरण नंबर पर ब्यूप्रेनॉर्फिन और नालोक्सोन की 36,000 गोलियों की खरीद दर्ज थी। डॉ. सैयद मतीन ने खुद को मनोचिकित्सक बताया था और क्लीनिक का प्रभारी होने की बात कही थी। लेकिन काउंसिल के रिकॉर्ड में मनोचिकित्सा की विशेषज्ञता से जुड़ी उनकी योग्यता दर्ज नहीं थी।
चार साल में इलाज कराने वालों की संख्या आठ गुना से ज्यादा
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में केंद्र से मदद पाने वाले नशामुक्ति केंद्रों में 2021-22 में 5, 382 लोगों ने इलाज कराया। 2025-26 में यह बढ़कर 46,491 हो गई। इनमें से 9,960 लोग जम्मू जिले के थे। ये आंकड़े सरकारी केंद्रों में इलाज कराने वालों के हैं।