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जम्मू-कश्मीर की जन शिकायतें अब केंद्रीय पोर्टल से जुड़ेंगी, जल्द यह प्रक्रिया हो जाएगी पूरी

Sat, 16 Nov 2019 02:01 AM IST
Pranjal Dixit बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर में सरकार के पास ऑनलाइन पोर्टल आवाज-ए-अवाम पर दर्ज होने वाली शिकायतों को अब नेशनल पोर्टल पर दर्ज कराने की तैयारी है। अगले कुछ महीनों में सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मानीटरिंग सिस्टम (सीपीजीआरएएमएस) से यह पोर्टल जुड़ जाएगा। इसके लिए केंद्र के प्रशासनिक सुधार व सार्वजनिक शिकायत विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश का दौरा कर आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने की कवायद शुरू कर दी है। सुशासन पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के नागरिक केंद्रित सुशासन सत्र में यह जानकारी दी गई। 
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सम्मेलन में प्रशासनिक सुधार व सार्वजनिक शिकायत विभाग के अधिकारी ने सीपीजीआरएएमएस के विषय में जानकारी दी कि यह पोर्टल आम लोगों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण की दिशा में काफी उपयोगी साबित हो रहा है। शिकायतकर्ता खुद ही अपनी शिकायतों की प्रगति को ट्रैक कर सकता है। इससे समय की बचत हो रही है। साथ ही दफ्तरों की अनावश्यक भागदौड़ से भी छुटकारा मिल सका है। 

गुजरात व बिहार के अधिकारियों ने भी अपने-अपने राज्य में शिकायतों के निस्तारण के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया के अनुभवों को साझा किया। जम्मू-कश्मीर के आवाज-ए-अवाम के बारे में बताया कि इस पर 24 घंटे और सप्ताह के किसी भी दिन शिकायत दर्ज कराया जा सकता है। प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है क्योंकि एक बार दर्ज शिकायत किसी भी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता।
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शिकायत के संबंध में रिमाइंडर या स्पष्टीकरण लेने का भी प्रावधान है। शिकायत दर्ज कराने के साथ ही एक रजिस्ट्रेशन नंबर तथा ट्रैकिंग नंबर प्राप्त होता है, जिस पर शिकायतकर्ता आसानी से शिकायतों के निस्तारण की प्रगति की जानकारी हासिल कर सकता है। 
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मलिक ने 88 हजार से अधिक शिकायतें निबटाई थीं
महबूबा सरकार के गिरने के बाद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने पांचों सलाहकारों के लिए दिन निर्धारित किए थे, जो जम्मू और श्रीनगर में बारी-बारी से दो घंटे जनता की समस्याएं एवं शिकायतें सुनते थे। ग्रीवांस सेल का भी गठन किया गया था। सरकार न रहने के बाद भी राज्यपाल प्रशासन ने 88 हजार से अधिक प्राप्त शिकायतों का निस्तारण किया था। खुद मलिक प्राप्त शिकायतों तथा उसके हल होने की निगरानी करते थे। इसके लिए उन्होंने ग्रीवांस सेल के नंबर भी सार्वजनिक किए थे। अनुच्छेद 370 हटने के बाद जब घाटी में बंद का माहौल था तब भी राज्यपाल प्रशासन की ओर से चर्च लेन स्थित ग्रीवांस सेल को सुचारु रखा गया। तब कश्मीरी पंडितों समेत शहर के विभिन्न इलाकों से लोगों ने पहुंचकर अपनी बात रखी थी। 
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