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जम्मू-कश्मीर: रिटायर्ड कर्मी को ओजीडब्ल्यू बताकर जेल में रखा, बिना ठोस आधार आतंकी मददगार बताया, पुलिस को फटकार

Fri, 09 Oct 2026 11:00 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कठुआ के 66 वर्षीय सेवानिवृत्त चिकित्सा कर्मी रोमालू राम पर बिना ठोस आधार आतंकी मददगार बताकर लगाए गए पीएसए हिरासत आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उनकी तत्काल रिहाई के निर्देश दिए।
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हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार - फोटो : एआई
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विस्तार
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पुलिस ने कठुआ निवासी 66 वर्षीय सेवानिवृत्त चिकित्सा कर्मी रोमालू राम को अपने डोजियर में हिस्ट्रीशीटर और आतंकी संगठनों का मददगार (ओजीडब्ल्यू) बताया, लेकिन उनके खिलाफ एक भी सामान्य आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। इसी डोजियर के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट ने उनके खिलाफ पीएसए के तहत एहतियाती हिरासत का आदेश जारी कर दिया।

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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने वीरवार को मामले की सुनवाई में पुलिस की कार्रवाई और हिरासत आदेश पर गंभीर सवाल उठाते हुए हिरासत को रद्द कर उनकी तत्काल रिहाई के आदेश दिए। न्यायमूर्ति राहुल भारती ने रोमालू राम के बेटे जगजीत सिंह की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में कठुआ के एसएसपी की ओर से प्रस्तुत डोजियर के आधार पर चार अप्रैल को जारी हिरासत आदेश को चुनौती दी गई थी।
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किस संगठन से जुड़ाव, डोजियर में उल्लेख ही नहीं
कोर्ट ने पाया कि डोजियर में यह तक स्पष्ट नहीं किया गया कि रोमालू राम को किस विशेष आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। कोर्ट ने डोजियर में शामिल सामग्री की भी जांच की और पाया कि उसमें दर्ज कुछ बातें किसी अन्य व्यक्ति से संबंधित नकल प्रतीत होती हैं जिन्हें आधार बिना याचिकाकर्ता से जोड़ दिया गया। कोर्ट ने इन परिस्थितियों में जम्मू जिला जेल के अधीक्षक को रोमालू राम को तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए।

राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था में अंतर नहीं किया
हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश से ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी ने राज्य की सुरक्षा को प्रभावित करने वाली गतिविधियों और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों के बीच आवश्यक अंतर को नहीं समझा। कोर्ट के अनुसार, हिरासत का आदेश देते समय राज्य की सुरक्षा से संबंधित आधारों को सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों के साथ गलत तरीके से मिलाया गया।

सलाहकार बोर्ड की प्रक्रिया पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने हिरासत को मंजूरी देने के दौरान सलाहकार बोर्ड द्वारा अपनाई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री में हिरासत की कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए ठोस तथ्यात्मक आधार नहीं था। पीठ ने हिरासत को कानूनन दुर्भावनापूर्ण और अस्थिर माना तथा व्यक्ति की स्वतंत्रता बहाल करने का आदेश दिया।
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