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Jammu News: सेवानिवृत्त अस्थायी कर्मियों ने कार्यकारी अभियंता का किया घेराव

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जल शक्ति विभाग के कार्यकारी अ​धिकारी का घेराव करते कर्मचारी।
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सांबा। जल शक्ति विभाग के सेवानिवृत्त अस्थायी कर्मचारियों और ड्यूटी के दौरान दो कर्मियों की मौत पर उन्हें कोई सहायता नहीं दिए जाने पर उनके परिजनों ने शनिवार को विभाग के कार्यकारी अभियंता का घेराव किया।
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पूर्व सरपंच रविंद्र सिंह ने बताया कि एक वर्ष पूर्व अपनी ड्यूटी देते हुए दो लोगों की मौत हो गई थी। उनके परिजनों ने सड़क को बंद कर विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बाद में एडीसी व विभाग के कार्यकारी अभियंता ने मौके पर पहुंच कर उन्हें 60-60 हजार रुपये रेड क्राॅस की ओर से मदद करने का आश्वासन दिया था। एक वर्ष बीत जाने पर भी उन्हें सरकारी सहायता नहीं दी गई। इसको लेकर उनके परिजनों ने शनिवार को कार्यकारी अभियंता के कार्यालय में पहुंचकर अधिकारियों का घेराव किया व नारेबाजी की। मृतक अशोक कुमार की पत्नी शारदा देवी ने बताया कि उनका एक बेटा है। उसका पालन पोषण करना मुश्किल हो गया है। मृतक बचन दास की पत्नी ममता देवी ने कहा कि उनकी दो बेटियां हैं। उनकी चिंता बनी रहती है। उन्हें आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया गया था लेकिन कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। भोला राम ने बताया कि उनकी माता बीमार थीं। उनके उपचार के लिए उन्होंने आवेदन दिया था। सरकार की ओर से 60 हजार रुपये की मदद देने के लिए बजट पास किया गया था लेकिन विभाग की ओर से कोई सहायता नहीं मिली। बलवान सिंह ने कहा कि जल शक्ति विभाग से नौ कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए थे। उनमें से सबको 60-60 हजार रुपये दिए जाने के लिए सरकारी आदेश भी निकाला गया लेकिन विभाग ने किसी को कोई मदद नहीं दी। पूर्व सरपंच ने विभाग पर आरोप लगाया कि जिन लोगों की सरकार की ओर से मदद के लिए विभाग को बजट दिया गया था। विभाग की लापरवाही यह लैप्स हो गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने विभाग से उनकी शीट बनाने के लिए 22 मार्च तक का समय दिया था लेकिन विभाग ने शीट तक नहीं बनाई और बजट लैप्स हो गया। इसको लेकर उन्होंने विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और सरकार से अपील की है कि ऐसे अधिकारियों को नौकरी से निकाला जाए जो गरीबों के हक पर डाका डाल रहे हैं। पूर्व सरपंच रविंद्र सिंह
के अनुसार जल शक्ति विभाग के ठेकेदारों के बिल तो समय पर निकाल दिए गए लेकिन गरीब लोगों को सहायता नहीं दी गई। जल शक्ति विभाग ने ऐसे 48 मामले सरकार को भेजे थे, जिन पर सरकार की ओर से बजट उपलब्ध करवाया गया लेकिन विभाग ने समय पर उनकी शीट नहीं बनाई और बजट लैप्स हो गया।
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