जम्मू। नियमितीकरण नीति को लागू करने और अन्य मांगों के समर्थन में जम्मू-कश्मीर लेबर यूनाइटेड फ्रंट के सदस्यों ने वीरवार को मंडल आयुक्त को ज्ञापन सौंप कर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान फ्रंट के सदस्यों ने मांगे नहीं मानने पर 22 जून से 48 घंटे की काम छोड़ हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। गौरतलब है कि, कैजुअल लेबर लंबे समय से सरकार से नियमितीकरण की मांग कर रहे है।
फ्रंट के नेता तनवीर हुसैन ने कहा कि सरकार ने कैजुअल, डेलीवेजर और नीड बेस्ड वर्करों की अनदेखी की है। सरकार स्वयं मान चुकी है कि सरकारी विभागों में 60 हजार से ज्यादा अस्थायी कर्मचारी काम कर रहे हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिजली, पीएचई, सड़क एवं भवन निर्माण विभाग, एस्टेट विभाग, कृषि के अलावा अन्य विभागों में दशकों से अस्थायी कर्मचारी काम कर रहे हैं। हजारों अस्थायी कर्मचारियों के साथ न्याय हो इसके लिए चुतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी किया जाना चाहिए। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर में न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू करने की भी मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है। ऐसे में यहां अब न्यूनतम वेतन अधिनियम लागू किया जाना चाहिए। इस दौरान सदस्यों ने कहा कि अगर 10 दिनों तक सरकार ने उनकी मांगों नहीं मानी तो कर्मचारी 48 घंटे की काम छोड़ हड़ताल पर जाएंगे। मंडल आयुक्त कार्यालय में प्रदर्शन करते हुए कर्मचारियों ने कहा कि सरकार का रवैया निराशाजनक है। इस अवसर पर कृषि विभाग से राजन शर्मा, एस्टोट विभाग से कुलदीप राज, फ्लोरीकल्चर विभाग से देवी दास, बिजली विभाग से स्वामी राज, सड़क एवं भवन निर्माण विभाग से सतीश शर्मा समेत बड़ी संख्या में अस्थायी कर्मचारियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।