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Jammu News: सरकारी खरीद नीति अटकी, डेढ़ साल से इंतजार कर रहे कारोबारी

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जम्मू। प्रदेश में नई खरीद नीति लागू न होने से स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि सरकारी विभागों की ज्यादातर खरीद बाहरी कंपनियों से हो रही है जबकि स्थानीय इकाइयां पिछले डेढ़ साल से नई खरीद नीति लागू होने का इंतजार कर रही हैं। मसौदा तैयार होने और उद्योग संगठनों से सुझाव लेने के बाद भी नीति लागू नहीं हो सकी है।
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सरकारी खरीद में बड़ी बाहरी कंपनियों के सामने छोटी स्थानीय इकाइयों के लिए टिके रहना मुश्किल हो रहा है। इसका असर उत्पादन के साथ रोजगार पर भी पड़ रहा है। लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण परगाल ने बताया कि सितंबर 2024 में नई खरीद नीति का मसौदा तैयार किया गया था। उद्योग संगठनों से सुझाव मांगे गए थे लेकिन नीति लागू नहीं हो सकी। विभाग ने जब सुझाव मांगे थे तो मांग की गई थी कि सरकारी विभाग अपनी कुल खरीद का 30 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय एमएसएमई इकाइयों से करें। इसके अलावा स्थानीय उत्पादों को 25 प्रतिशत तक कीमत में प्राथमिकता देने का सुझाव भी दिया गया था।

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पुरानी नीति में स्थानीय उद्योगों को मिलती थीं रियायतें

पहले प्रदेश में स्थानीय उद्योगों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता मिलती थी। बिजली, जल शक्ति, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और नगर निगम जैसे विभाग अधिकतर सामान स्थानीय इकाइयों से खरीदते थे। स्थानीय इकाइयों को 20 प्रतिशत तक कीमत में छूट मिलती थी। उद्योग संगठनों का कहना है कि इसी व्यवस्था की वजह से प्रदेश में सैकड़ों छोटी इकाइयां चल रही थीं। अगर नई खरीद नीति समय पर लागू हो जाती तो स्थानीय उद्योगों को काफी राहत मिलती।
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पुरानी व्यवस्था खत्म होने से बढ़ीं मुश्किलें

संगठनों के अनुसार पुरानी व्यवस्था के दौरान प्रदेश में करीब 500 औद्योगिक इकाइयां चल रही थीं और हजारों लोगों को रोजगार मिला था। हालांकि जीएसटी लागू होने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद व्यवस्था खत्म हो गई। अब न तो पहले जैसी कीमत में छूट मिलती है और न ही टैक्स में राहत। एफटीटीआई के अध्यक्ष संजय बंसल का कहना है कि सरकारी खरीद अब बड़े पैमाने पर जेम पोर्टल के जरिये हो रही है जहां बाहरी कंपनियां हावी हैं। उद्योग विभाग के निदेशक अरुण मन्हास ने बताया कि संगठनों से मिले सुझावों को शामिल करने के बाद वित्त विभाग और अन्य संबंधित विभागों को मसौदा भेज दिया गया है। प्रक्रिया आखिरी चरण में है और नीति जल्द लागू हो सकती है।
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