जम्मू। जेलों में कैदियों से मोबाइल फोन मिलने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा। कुख्यात अपराधी और आतंकी जेलों में बैठ कर नेटवर्क चला रहे हैं। जेल विभाग इस पर अंकुश लगाने के लिए गंभीर नहीं दिख रहा है। वर्षों से जेलों में 4जी नेटवर्क को जाम करने वाले जैमर लगाने का प्लान सरकार के पास धूल फांक रहा है, लेकिन इस पर कोई तवज्जो नहीं दी जा रही।
जानकारी के अनुसार प्रदेश की 14 जेलों में 4500 कैदी बंद हैं। इनमें कई पाकिस्तानी और कश्मीरी आतंकी हैं। इसके अलावा जम्मू के कुख्यात गैंगस्टर और अपराधी भी सजा काट रहे हैं। श्रीनगर और जम्मू की सेंट्रल जेल में कई बार कैदियों से मोबाइल फोन मिले हैं। अभी हाल ही में जम्मू की कोट भलवाल जेल से 11 मोबाइल फोन समेत पेन ड्राइव और चाकू मिले। यहां तक कि कुछ देर पहले जेल में बंद दो गैंगस्टरों की पार्टी की तस्वीरें भी वायरल हुई थीं। इस तरह की घटनाएं होने के बाद भी जेलों में कैदियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल होने पर अंकुश नहीं लग रहा। जो जेलों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। खासकर श्रीनगर की सेंट्रल जेल, कठुआ के हीरानगर की उप जेल और जम्मू की कोट भलवाल जेल में बंद कैदी किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।
ड्रोन की हद से दूर नहीं कोट भलवाल जेल
जिस तरह से आतंकी संगठन ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में यह जेल भी ड्रोन की हद से दूर नहीं है। कोट भलवाल जेल के पास पाकिस्तानी गुब्बारे को भी देखा जा चुका है। आतंकियों के निशाने पर भी यह जेल है। कई बार बाहर से अंदर मोबाइल फोन फेंके गए हैं।
जैमर लगाने की योजना सरकार के पास भेजी गई है
जेलों में जैमर लगाने की योजना सरकार के पास भेजी गई है, लेकिन पूरी तरह से मोबाइल सेवा को ही जाम करना भी उचित नहीं। लिहाजा हम विचार कर रहे हैं कि मोबाइल नेटवर्क को प्रतिबंधित करने की तकनीक विकसित की जाए। अब इसको किस तरह से प्रभावी बनाया जा सकता है। इस पर विचार चल रहा है।
-एमएस लोन, डीआईजी, जेल विभाग, जम्मू