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खेतों से उपभोक्ता तक पहुंचते ही पांच गुना बढ़ गए सब्जियों के दाम

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जम्मू। कोरोना संकट के बीच सब्जी उत्पादकों के साथ आम लोगों पर भी मार पड़ रही है। खेतों से उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते सब्जियों के दाम पांच गुना बढ़ जा रहे हैं। न किसानों को कोई फायदा हो रहा है और न ही आम लोगों को कोई राहत मिल रही है। कोरोना कर्फ्यू के बीच बिचौलिये जेबें भर रहे हैं। सरकारी तंत्र की निगरानी न होने के कारण कई सब्जी विक्रेता मनमाने दाम वसूल रहे हैं। शहर के हर गली-मोहल्ले में अलग-अलग रेट से सब्जी बिक रही है।
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सब्जी उत्पादक क्षेत्र दोमाना के किसान सुरेश कुमार और दीपक पांडे का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के बीच किसानों को सब्जी बेचने में मुश्किलें आ रही हैं। मंडियों में दाम न मिलने के कारण खेतों में सब्जियां खराब हो रही हैं। मंडियों में किसानों से चार रुपये किलो खीरा, पांच रुपये टमाटर, तीन रुपये बंदगोभी और तीन रुपये मूली प्रति किलो के हिसाब से खरीदी जा रही है।
उधर, जम्मू के डोगरा चौक के पास सब्जी लेने आए सुरेंद्र जमवाल, नरेश गुप्ता और इरशाद अहमद कहते हैं कि उपभोक्ताओं को खीरा 20, टमाटर 25- 30 और गोभी 25 से 30 रुपये प्रति किलो मिल रही है। यानी किसान से उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते पांच से छह गुना रेट बढ़ जा रहे हैं। अन्य सब्जियों के भी यही हाल हैं। सब्जी मंडी और बाजार के दामों में भी भारी अंतर है। उनका कहना है कि सरकारी तंत्र की निगरानी न होने के कारण कोरोना कर्फ्यू के बीच कई सब्जी विक्रेता मनमाने रेट वसूल रहे हैं। रेहड़ी पर सब्जी बेचने वाले सोमनाथ, मनोज और हरिया ने बताया कि वह मोहल्लाें में जाकर सब्जी बेचते हैं। मंडी से सब्जी लाने में भी खर्चा होता है। ऐसे में खर्चा डालकर जो रेट बनता है। उसी रेट पर सब्जी बेची जाती है। वेयरहाउस के पास सब्जी विक्रेताओं ने कहा कि 20 दिन पहले पंजाब और अन्य राज्यों से सब्जियों की सप्लाई आती थी। अब पहाड़ी इलाकों से सब्जियां आना शुरू हो गई हैं, इसलिए भी कुछ सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी हुई है।
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उत्पादन का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे किसान
अखनूर के सब्जी उत्पादक कश्मीरी लाल ने बताया कि मौजूदा समय में मंडी में सब्जियों के रेट कम मिल रहे हैं। बाजार भी खुले नहीं हैं। ऐसे में मेहनत बेकार जा रही है। आरएस पुरा के किसान होशियार सिंह ने बताया कि मंडी ही एक साधन बचा है, जहां वे सब्जी को बेच सकते हैं, लेकिन रेट कम हैं। मेहनत भी पूरी नहीं मिल रही। जोगिंद्र सिंह निवासी चट्ठा ने बताया कि वह काफी समय से सब्जी उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन मंडी में बहुत कम रेट उन्हें मिलते हैं। कोरोना कर्फ्यू के कारण सब्जी बाजार में नहीं बेच सकते।
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मंडी में सब्जियां जायज रेट में बेची जा ही हैं, लेकिन दुकानें खुलने का समय कम होने से सब्जियां नहीं बिक पा रहीं, इससे दुकानदार भी मंडी से कम माल उठा रहे हैं, यहां सब्जी डंप हो रही है। इससे किसानों से कम रेट में सब्जी उठाई जा रही है।
सुरिंद्र कुमार, अध्यक्ष, सब्जी मंडी नरवाल
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सब्जी मंडी रेट दुकान/रेहड़ी
भिंडी 20 रुपये 35 से 40 रुपये
घिया 10-15 रुपये 30 से 40 रुपये
शिमला मिर्च 6-8 रुपये 30 से 35 रुपये
आलू 10-15 रुपये 20 से 25 रुपये
बंद गोभी 04 रुपये 20 से 25 रुपये
टमाटर 08-10 रुपये 30 रुपये
मटर फली 15-20 रुपये 45 से 60 रुपये
साग 10 रुपये 30 से 40 रुपये
गाजर 10 रुपये 30 से 40 रुपये
बैगन 05 रुपये 20 से 25 रुपये
खीरा 02-05रुपये 15 से 20 रुपये
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उचित दाम न मिलने से खेतों में खराब हो रही सब्जी
दोमाना। दोमाना के सब्जी उत्पादक सुरेश कुमार, दीपक पांडे ने बताया कि मंडी में उचित दाम न मिलने से खेतों में सब्जियां खराब हो रही हैं। मढ़ के निवासी तरसेम लाल और बलविंदर कुमार का कहना है कि डॉक्टर सब्जियां खाने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन दाम बढ़ने से आम नागरिक के लिए सब्जी खरीदना मुश्किल हो गया है। मढ़ के घसीटा राम ने कहा कि सब्जियों के दाम जरूर बड़े हैं, लेकिन दुकानदार भी अपनी मर्जी से कीमत लगा रहे हैं। मिश्रीवाला के निवासी गुरबचन सिंह के अनुसार सब्जी विक्रेता सिर्फ अपना ही पेट भर रहे हैं, उन्हें आम लोगों की परवाह नहीं। 20 रुपये की चीज 50 में बेची जा रही है।
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