जम्मू। मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता ने परिहवन विभाग को मार्च तक जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (जेकेआरटीसी) को घाटे से उबारने को कहा है, लेकिन सरकार ने पिछले तीन महीने से खुद जेकेआरटीसी के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया है। बिन वेतन के काम करने वाले कर्मचारियों से सरकार राजस्व जुटाने की उम्मीद कर रही है। जेकेआरटीसी के 1700 कर्मचारी सरकार की अनदेखी का शिकार है, जिसका असर परिवहन सुविधा पर पड़ रहा है।
जेकेआरटीसी के कर्मचारियों का पांच महीने का वेतन बकाया था, लेकिन गत दिनों उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जिसके बाद सरकार ने दो महीने वेतन जारी किया है, जबकि अभी तीन महीने का वेतन बकाया है। जेकेआरटीसी वर्कर यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष परमजीत सिंह ने कहा कि सरकार के रवैये से जेकेआरटीसी के कर्मचारी चिंतत है। कर्मचारियों और कारपोरेशन के प्रति सरकार की कार्य योजना समझ से परे है। कारपोरेशन में चालकों की कमी है, जिसके चलते बसें खड़ी हैं। सरकार नई भर्ती की बजाए ऑउटसोर्स करने की योजना बना रही है, लेकिन वह भी परवान नहीं चढ़ पा रही है। उन्होंने कहा कि कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ सेवानिवृत्त कर्मचारी को लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार जेकेआरटीसी को घाटे से उबारे की बात करती है, लेकिन बिना कर्मचारियों को वेतन दिए ऐसा करना सरकार और कर्मचारियों के लिए मुश्किल है।