फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

माइन फ्री एरिया में कहां से आई बारूदी सुरंग

विज्ञापन
विज्ञापन
राजोरी की नौशेरा तहसील के एलओसी के पास बसे गांव सरया (झांगड़) में शनिवार की सुबह बारूदी सुरंग फटने से तीन मजदूरों की मौत और एक मजदूर के घायल होने के मामले में डीसी ने जांच के निर्देश जारी किए हैं। जानकारी के अनुसार, डीसी दिप्ती उप्पल ने नौशेरा के एसडीएम हितेश गुप्ता और एसडीपीओ सरगुन शुक्ला को जांच का जिम्मा सौंपा है।
विज्ञापन


डीसी ने एसडीएम और एसडीपीओ को विस्फोट के पीछे के कारणों का पता लगाने व विस्फोटक पदार्थ के बारे में जानकारी प्राप्त करने के निर्देश जारी किए हैं। दोनों अधिकारियों को एक हफ्ते के भीतर मामले की पूरी जांच कर रिपोर्ट पेश करनी है। इस संबंध में एसएसपी डा. हसीब मुगल ने बताया कि नौशेरा पुलिस अपने स्तर पर भी मामले की जांच कर रही है।

विस्फोट वाले स्थान से कुछ खास सबूत नहीं मिल पाने से विस्फोटक पदार्थ के बारे में पता लगाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। उस क्षेत्र को माइन फ्री करार दे दिया गया था, लेकिन विस्फोट के बाद दावे खोखले साबित हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

वर्ष 1999 में बिछाई गई थी बारूदी सुरंगें

एएसपी नौशेरा के अनुसार, सेना द्वारा बारूदी सुरंगें तो बिछा दी गई थी, लेकिन सुरंगें बिछाने वाले स्थानों की सही प्रकार से निशानदेही नहीं की गई थी। यही कारण है कि वहां कई बार विस्फोट होते रहते हैं और बेकसूर लोगों को अपनी जान से हाथ धोने पड़ते हैं। वहीं शनिवार की देर रात सेना ने विस्फोट वाले स्थान से दो और विस्फोटक पदार्थ बरामद किए हैं।

बताया जा रहा है कि सेना के बम निरोधक दस्ते ने उसी स्थान से तलाशी के दौरान दो और विस्फोटक पदार्थ बरामद कर जांच के लिए भेज दिए हैं। अभी तक बरामद किए गए विस्फोटक पदार्थों के बारे में कोई और जानकारी नहीं मिल पाई है। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान नौशेरा और सुंदरबनी के नियंत्रण रेखा के आस पास भारी संख्या में बारूदी सुरंगें बिछाई गई थीं।

उसके बाद अब तक पिछले करीब 15 सालों में इन क्षेत्रों में विस्फोट में कई लोग अपनी जान से हाथ धो चुके हैं और कई अन्य अपाहिज हो चुके हैं। इसके अलावा काफी पशु भी मारे जा चुके हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें