निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल करने वाले कई विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में दाखिला लेकर शिक्षा हासिल करना चाहते हैं, लेकिन इनके लिए निजी स्कूलों से स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट लेना परेशानी का सबब बन जाता है। यह बात शिक्षा विभाग की तरफ से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए चलाए गए अभियान में सामने आई है।
सरकारी स्कूलों में घट रही विद्यार्थियों की संख्या शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्रिंसिपल की देखरेख में शिक्षक और विद्यार्थी लोगों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में एडमिशन करवाने के लिए जागरूक करते हैं। लोगों को बताया जाता है कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को गुणवत्ता भरी शिक्षा प्रदान की जा रही है और शिक्षा के साथ ही सुविधाएं भी मिल रही हैं।
जागरूक होने पर जब कोई अभिभावक अपने बच्चे को निजी स्कूल से हटाकर सरकारी स्कूल में एडमिशन करवाना चाहता है तो उसके लिए निजी स्कूल से स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट लेना परेशानी का सबब बन जाता है, क्योंकि निजी स्कूल सर्टिफिकेट आसानी से देने को तैयार ही नहीं होते हैं।
जागरूकता अभियान चलाने वाले शिक्षकों ने इसकी एक रिपोर्ट तैयार करके शिक्षा निदेशक के कार्यालय में जमा करवाई है, जिसमें ऐसे निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रावधान रखने की मांग की गई है। लेकिन अभी तक शिक्षा निदेशक के कार्यालय से इसको लेकर कोई सख्त आदेश नहीं जारी हो सके हैं।