दर्जनों देसी और विदेशी पक्षियों की प्रजातियों ने रंजीत सागर झील में पिछले बीस वर्षों में बसेरा बनाना शुरू कर दिया है। वर्ष 2000 में तैयार हुए रंजीत सागर बांध की झील किनारे प्राकृतिक आवास बनाने में इन परिंदों को कई वर्ष लग गए हैं, लेकिन अवैध रूप से होने वाले शिकार पर विभाग को कड़ी नजर बनाए रखने की जरूरत है। चूंकि इन परिंदों के आने के साथ ही जहां शिकारी सक्रिय हो जाते हैं, वहीं खतरा भांपकर एक बार लौटने वाले परिंदे फिर यहां नहीं आएंगे। ऐसे में वन्यजीव विभाग ने जागरूकता कार्यक्रमों के अलावा क्षेत्र में होर्डिंग लगाने की भी तैयारी की है।
सुरुईंसर और मानसर से भी अधिक संख्या में प्रवासी पक्षियों को इस सीजन में रंजीत सागर झील किनारे देखा गया है। विभाग के संज्ञान में पहले नहीं था। पिछले दो सप्ताह में ही 45 से अधिक प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां देखी गई हैं। विभाग के लिए बड़े अचंभे की बात है। चूंकि यह मानव निर्मित वेटलैंड है, ऐसे में इस सीजन का सेंसस पूरा होने और पक्षियों के यहां रुकने का समय जांचने के बाद ही प्रपोजल आगे बढ़ाया जाएगा। इस सीजन के नतीजों के आधार पर देखा जाएगा कि परिंदे अस्थायी तौर पर रहते हैं या पूरे मौसम में देखे जाते हैं। -विजय कुमार वर्मा, वार्डन, वन्यजीव विभाग, कठुआ