परिसीमन आयोग ने केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन पर अंतिम रिपोर्ट जारी कर सकता है। पुडुचेरी की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कश्मीरी पंडितों और पीओजेके विस्थापितों को प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है। विधानसभा हलकों के निर्धारण के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई के नेतृत्व में गठित परिसीमन आयोग ने इस आशय के सिफारिश की तैयारी की है, जिसमें केंद्र सरकार को इनके मुद्दों पर विचार करने को कहा जाएगा। इसके तहत केंद्र सरकार को मनोनयन का अधिकार होगा। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 30 सदस्यीय विधानसभा में केंद्र सरकार तीन सीटों पर मनोनयन करता है।
प्रत्येक लोकसभा में होंगे 18 विधानसभा क्षेत्र
जम्मू-कश्मीर की लोकसभा सीटों में भी परिसीमन आयोग ने फेरबदल किया है। अब कश्मीर व जम्मू दोनों संभागों के हिस्से ढाई-ढाई लोकसभा सीटें होंगी। पहले जम्मू संभाग में उधमपुर डोडा व जम्मू तथा कश्मीर में बारामुला, अनंतनाग व श्रीनगर की सीटें थीं। नई व्यवस्था के तहत अनंतनाग सीट को अब अनंतनाग-राजोरी पुंछ के नाम से जाना जाएगा यानी जम्मू सीट से दो जिले राजोरी व पुंछ निकालकर अनंतनाग में शामिल कर किए गए हैं। प्रत्येक लोकसभा सीट में 18 विधानसभा सीटें होंगी। उधमपुर सीट से रियासी जिले को निकालकर जम्मू में जोड़ा गया है।
सात सीटें बढ़ीं, इनमें छह जम्मू व एक कश्मीर में
राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार विधानसभा की सात सीटें बढ़ाई जानी हैं। इससे विधानसभा में सदस्यों की संख्या 83 से बढ़कर 90 की जानी हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले विधानसभा में सीटों की संख्या 87 थी जिसमें चार सीटें लद्दाख की थीं। लद्दाख के अलग होने से 83 सीटें रह गईं, जो बढ़ने के बाद 90 हो जाएंगी। परिसीमन आयोग ने सात सीटों में एक सीट कश्मीर और छह सीटें जम्मू संभाग में बढ़ाई हैं।