गर्मी के मौसम में संभाग में बिजली की अघोषित कटौती से उपभोक्ताओं को राहत मिलने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रिड स्टेशनों से लेकर रिसीविंग स्टेशनों पर ओवरलोड कम नहीं हो पाया है। इसके अलावा डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों पर भी तय क्षमता से अधिक लोड को कम नहीं किया जा सका है। इसका नतीजा आगामी गर्मी के मौसम में देखने को मिल सकता है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रियासत में बिजली की समस्या के लिए अनेकों कारण जिम्मेदार हैं। इसमें बिजली ढांचों पर जरूरत से ज्यादा लोड, पुराना ढांचा, बिजली की मांग और उपलब्धता में भारी अंतर, ढांचागत कमियां और आरएपीडीआरपी प्रोजेक्ट पर जारी कार्य मुख्य रूप से शामिल हैं।
रियासत में बिजली की मांग मौजूदा समय में 2700 मेगावाट को भी पार कर चुकी है। वहीं रियासत के अपनी पन बिजली परियोजनाओं में उत्पादन की 1419.37 मेगावाट क्षमता को ही हासिल किया जा सका है। इनमें भी 1110 मेगावाट क्षमता पन बिजली परियोजनाओं की है, जो कि अधिकतर रन द वाटर स्कीम पर होने की वजह से पूरी क्षमता के मुताबिक उत्पादन नहीं कर पाती हैं।