पुंछ जिले के बफलियाज से वाया देहरागली-थन्नामंडी के रास्ते राजोरी को जोड़ने वाली इस सड़क को मुगलरोड के साथ जोड़ने के उद्देश्य से पिछले तीन वर्षों से सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इसके चलते पूरी सड़क को उखाड़ा गया है। जगह-जगह मलबा पड़ा है।
पुंछ जिले की सुरनकोट तहसील में बफलियाज-देहरागली मार्ग पर आतंकियों को हमले में उभड़-खाबड़ सड़क भी मददगार साबित हुई। जवानों को मोर्चा संभालने तक का मौका नहीं मिला। खस्ताहाल सड़क की वजह से पांच घरों के चिराग बुझ गए।
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बफलियाज-देहरागली-थान्नामंडी सड़क के चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है, लेकिन काम तीन साल से सुस्त चाल चला है, जो जवानों की शहादत का कारण बन गया। अगर सड़क जर्जर न होती तो शायद आतंकी इतने बड़े हमले को अंजाम देने में सफल नहीं हो पाते।
आतंकवाद के दौर में भी इस मार्ग पर आतंकियों द्वारा कई बार सुरक्षा बलों के वाहनों पर गोलीबारी करने की घटनाओं को अंजाम दिया जाता रहा है, लेकिन उस समय चाहे सड़क तंग होती थी, लेकिन हालत काफी अच्छी होने से आतंकी कभी नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए।
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घने जंगल की आड़ में आतंकियों की ओर से जिन वाहनों पर गोलीबारी की जाती थी, सैन्य बल के चालक उन्हें पूरी गति से भगाकर सुरक्षित निकालने में सफल हो जाते थे और तत्काल अन्य सुरक्षाबल घटनास्थल पर पहुंच जाते थे। लेकिन बीते दिन जिस सावनी इलाके में आतंकियों ने हमला किया, वहां सड़क काफी खस्ताहाल है, जिससे सैन्य वाहनों को निकालने में रुकावट पैदा हो गई और आतंकी इसका फायदा उठा गए।
मुगलरोड से जोड़ने के लिए मार्ग का तीन साल से चल रहा काम
पुंछ जिले के बफलियाज से वाया देहरागली-थन्नामंडी के रास्ते राजोरी को जोड़ने वाली इस सड़क को मुगलरोड के साथ जोड़ने के उद्देश्य से पिछले तीन वर्षों से सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इसके चलते पूरी सड़क को उखाड़ा गया है। जगह-जगह मलबा पड़ा है।
कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे और इनमें जमा दलदल से मार्ग पर लाख प्रयासों के बावजूद चालक वाहन को 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से नहीं दौड़ा पाते। आम लोगों और वाहन चालकों ने इस खस्ताहाल मार्ग पर आवागमन बंद कर दिया है। यहां तक कि शदराशरीफ जियारत पर जाने वाले यात्री भी इस मार्ग का प्रयोग नहीं करते।
जिसके कारण सड़क पूरी तरह सुनसान रहती है। ऐसे में देहरागली टॉप पर सैन्य मुख्यालय में जवानों को उतारकर बफलियाज लौट रहे 48 राष्ट्रीय राइफल्स के दो वाहनों पर आतंकियों को हमला करने का मौका मिल गया।
अगर सड़क की हालत खस्ता न होती तो इस पर लगातार वाहनों की आवाजाही रहती, जिससे आतंकी इस प्रकार के बड़े हमले को अंजाम देने में सफल नहीं हो पाते। शायद वे सैन्य वाहनों पर गोलीबारी करके ही वहां से भाग जाते।
स्थानीय लोग बोले - जर्जर सड़क पर वाहन से तेज तो हम पैदल चलते हैं
सावनी गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस सड़क की खस्ता हालत से हम लोग तीन सालों से परेशान हैं। कोई भी वाहन नहीं चलता। सड़क इतनी खराब है कि इस पर गाड़ी चल ही नहीं पाती, जिसके कारण हमें यहां से बफलियाज तक छह किलोमीटर पैदल आना-जाना पड़ता है। अगर सड़क इतनी खराब नहीं होती तो वीरवार को जो हादसा पेश आया है, वह नहीं होता, क्योंकि इस सड़क पर वाहन इतने धीरे चलता है कि हम पैदल उससे तेज चल लेते हैं।