जम्मू। मंदिरों के शहर जम्मू में दिवाली पर वायु प्रदूषण का स्तर बीते वर्ष की तुलना में कम रहा है। जनजीवन के लिए सबसे नुकसानदेह माने जाने वाले पीएम 2.5 माइक्रोमीटर आकार के कणों का स्तर लगभग आठ प्वाइंट कम दर्ज हुआ है। शहर और आसपास के इलाकों में लगाए गए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उपकरणों में 2.5 श्रेणी वाले रेस्पीरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम) का स्तर 49.8 रिकार्ड हुआ है। पिछले साल दिवाली पर इन कणाें का स्तर 57.59 रिकॉर्ड किया गया था।
2.5 श्रेणी वाले कण सेहत के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह माने जाते हैं। यह कण नाक और मुंह के रास्ते से शरीर में जमा हो जाते हैं। इससे कई बीमारियां होती हैं। जम्मू-कश्मीर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में शहर के प्रमुख नरवाल, एमए स्टेडियम और बाड़ी ब्राह्मणा में स्थापित वायु प्रदूषण जांच केंद्र में वर्ष 2018 में पीएम 2.5 का स्तर 57.59 (माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, सामान्य 60 (24 घंटे) और वार्षिक 40 माइक्रोग्राम) था। इस साल दिवाली पर यह स्तर गिरकर 49.8 पहुंच गया। इसी तरह से वर्ष 2018 में आरएसपीएम (पीएम-10) का स्तर 145 माइक्रोग्राम प्रतिक्यूबिक मीटर रिकॉर्ड हुआ था जो इस साल दिवाली पर 144.6 रहा है। हालांकि इसका सामान्य स्तर 100 को माना जाता है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक हेड लेबोरेटरी जम्मू डिवीजन व राज्य बोर्ड समीक्षक डॉ. यशपाल का कहना है कि पीएम 2.5 प्रदूषण में गिरावट आना राहत की बात है। लोगों में जागरूकता को बढ़ावा देकर इस प्रदूषण को और कम किया जा सकता है।
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आम दिनों में भी सामान्य से दोगुना प्रदूषण
जम्मू शहर और आसपास के इलाकों में सड़कों पर दौड़ते हजारों वाहन, निर्माण कार्यों और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले प्रदूषण से पहले ही पिछले पांच साल से शहर में वायु प्रदूषण का स्तर सामान्य से पचास फीसदी ऊपर चल रहा है। वर्ष 2018 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सर्वे में 102 नान अटेनमेंट शहरों में जम्मू और श्रीनगर भी शामिल थे। इन शहरों में लगातार पांच साल से प्रदूषण का स्तर सामान्य से ऊपर रह रहा है।
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पीएम 10 का प्रदूषण स्तर (2019)
नरवाल केंद्र 163 (सामान्य 100)
एमए स्टेडियम 140
बाड़ी ब्राह्मणा 131
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एसओ 2 का स्तर भी गिरा
वर्ष 2018 की तुलना में इस साल दिवाली पर सल्फर डायोआक्साइड (एसओ 2) का स्तर भी गिरा है। वर्ष 2018 में सल्फर डायोआक्साइड 5.12 (लिमिट चौबीस घंटे 20, माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) था जो इस साल 4.61 दर्ज किया गया। यह गैस स्तर का प्रदूषण है जो थर्मल प्लांट से निकलता है। इसी तरह एनओ2 (नाइट्रोजन डायोआक्साइड) का वर्ष 2018 में स्तर 19.24 था जो इस बार थोड़ा बढ़कर 24.4 दर्ज किया गया। यह उर्वरकों से निकलता है।
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सीडी अस्पताल के चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. राहुल गुप्ता के अनुसार आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण से ब्रोंकाइटिस (खांसी), एलर्जी रिनटिक (नाक संबंधी एलर्जी), क्रानिक अबस्ट्रटिव (हवा संबंधी रोग) की शिकायत होती है। अगर जल्दी बारिश नहीं होती है तो कई तरह के केमिकल हवा में फैलकर एलर्जी की बीमारियां देते हैं।