सूर्यपुत्री तवी नदी हर तरफ से बर्बाद हो रही है। कुछ जगह पर जहां लोगों ने अतिक्रमण करके इसका दायरा कम कर दिया है, वहीं सारे शहर की गंदगी तवी में गिराई जा रही है।
संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट तो बना दिए गए, लेकिन कई अड़चनों और विभाग की रुचि नहीं होने पर प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं। एक्शन करने के नाम पर फाइलें विभागों में घुमाई जा रही हैं।
जम्मू की अधिकतर एनजीओ वर्ष में दो बार तवी नदी के लिए बाहर निकलती हैं। वे साख प्रवाह करने आने वालों से लिफाफे इकट्ठा करने के बाद पूरा वर्ष खामोश हो जाती हैं।
बड़े-बड़े अधिकारी, मंत्री तवी नदी को बचाने के लिए दलीलें तो बहुत देते हैं, लेकिन हकीकत में तवी नदी की छाती पर ही सारा खेल खेला जा रहा है।
अतिक्रमणकारियों ने अतिक्रमण कर लिया। विभागों को कचरा फेंकने के लिए जगह मिल गई। शहर के 17 बड़े गंदे नालों से पूरे शहर की गंदगी तवी नदी में गिरती है, जिसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनना है, जो कि अभी तक शुरू नहीं हो सका।
इसी तरह से 400 मीट्रिक टन कचरा तवी नदी में डंप किया जाता है। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के जरिये कचरे का निस्तारण होना है, लेकिन प्रोजेक्ट फाइलों में बंद है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तवी नदी के जल के प्रदूषित होने की रिपोर्ट भले ही राज्य या केंद्र सरकार में बैठे लोगों तक पहुंचा दी, लेकिन जमीनी स्तर पर संरक्षण के लिए कुछ नहीं हुआ।
कुछ जगह पर पानी ठहरा होने से मच्छर पनपने लगते हैं। अतिक्रमणकारियों ने कुदरत को हलके में लेते हुए बेली चराना तवी नदी में कच्चे से पक्के मकान बना दिए।
जेडीए और फारेस्ट लैंड होने के कारण जिला प्र्रशासन चुप बैठा रहा और अधिकारियों की मिलीभगत से आज बड़ा हिस्सा अतिक्रमण के शिकंजे में है।
शहर के रेहड़ी, फड़ी, दुकान, ढाबा, रेस्तरां, होटल, गली मोहल्ला और सड़क से रोजाना निकलने वाला 400 मीट्रिक टन कचरा गोल गुजराल में डंप हो रहा है।
साइंटिफिक तरीके से इसे न दबाए जाने के कारण कई बीमारियों के जन्म लेने की आशंका बनी रहती है। तवी नदी में अतिक्रमण और गंदगी फैलने की जानकारी देने वाली फाइल वर्षों तक डीसी आफिस में पड़ी थी, अब उसे डिवकॉम कार्यालय में सरका दिया गया है, लेकिन अभी तक इस पर कोई एक्शन नहीं हो पाया है।