अनुच्छेद 370 और 35ए हटने के एक साल पूरे होने के करीब नए जम्मू-कश्मीर में सियासी हलचल तेज हो गई है। घाटी में तेजी से सियासी खिचड़ी पक रही है। पीडीपी सांसद नजीर लावे के नेतृत्व में एक और नया दल आकार ले रहा है।
माना जा रहा है कि यदि सब कुछ ठीकठाक रहा तो अगले कुछ महीनों में नई सियासी पार्टी अस्तित्व में आ सकती है। इसके साथ ही पीडीपी के किले में एक और सेंध लग सकती है। इससे पहले पीडीपी के कद्दावर नेता रहे अल्ताफ बुखारी के नेतृत्व में अपनी पार्टी का गठन हो चुका है, जिसमें पीडीपी के कई नेता शामिल हो चुके हैं।
सूत्रों ने बताया कि महबूबा मुफ्ती के पिछले एक साल से नजरबंद होने तथा जमीनी स्तर पर पार्टी की गतिविधियां ठप होने से लावे खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। पिछले साल उप राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के कारण पार्टी ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया था। तब से महबूबा से भी उनकी दूरी बढ़ गई है।
उनका सांसद का कार्यकाल अगले साल मार्च में समाप्त हो जाएगा। ऐसे में वह अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पीडीपी के अलावा नेकां, कांग्रेस के पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों तथा संगठन कुछ नेताओं से संपर्क साधा है। इन्हें नए दल के भविष्य तथा संभावनाओं को लेकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की है।
लावे बोले-सारे विकल्प खुले, जनता की दुश्वारियां कम होनी चाहिए
पीडीपी सांसद लावे का कहना है कि घाटी में राजनीतिक शून्यता की स्थिति आ गई है। राजनीतिक अस्थिरता के बीच क्षेत्रीय पार्टियां नेकां और पीडीपी लोगों की आकांक्षाएं पूरी करने में असफल रही हैं। एलजी प्रशासन के समक्ष लोग समस्याएं लेकर पहुंच नहीं पा रहे हैं और न ही यह कोई स्थायी विकल्प है।
ऐसे में घाटी में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। इसके लिए जो भी विकल्प हों, उसे तलाशना चाहिए। इसमें नई पार्टी भी हो सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने कश्मीर में खानदानी राज के खिलाफ विकल्प तैयार करने की बात कही है। बदलाव होना चाहिए। आखिर कब तक हम आतंकवाद का दंश झेलते रहेंगे। हालात बदलने पर हम वही काम करेंगे जो कश्मीर का अवाम चाहता है। हालांकि, उन्होंने नए राजनीतिक दल के गठन पर गोलमोल जवाब देते हुए इतना ही कहा कि सारे विकल्प खुले हुए हैं।