जम्मू इकाई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उन्होंने केवल यहां के लोगों की आवाज उठाई है। उनका हक मांगा है। वह यहां शांति चाहते हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के समान विकास की बात कही है। भाजपा ने जितनी प्रमुखता से जम्मू की आवाज नहीं उठाई उतनी प्रमुखता से और खुलकर नेकां ने आवाज बुलंद की। धर्मनिरपेक्ष तरीके से सोचते हुए जम्मू इकाई ने पूरे प्रदेश के समन्वित विकास की बात की है। कहीं से भी पार्टी लाइन से इतर कोई बात नहीं हुई। इन सबके बावजूद कश्मीर में इतनी नाराजगी क्यों है। जम्मू इकाई ने ही पांच अगस्त 2019 के बाद जब सारी राजनीतिक गतिविधियां ठप पड़ी हुई थी तो यहां के कार्यकर्ताओं को जोड़े रखा। क्योंकि यहां और भी राजनीतिक विकल्प लोगों के पास है।
परिसीमन आयोग को दिया गया दस्तावेज सार्वजनिक है। जम्मू को उसका हक मिलना ही चाहिए। इससे वे पीछे नहीं हटेंगे। -देवेंद्र सिंह राणा, नेकां संभागीय अध्यक्ष