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अफस्पा की वापसी को रणनीति बनाने में जुटी पीडीपी

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त्रिपुरा में अफस्पा की वापसी के बाद पीडीपी इस मुददे पर नए सिरे से रणनीति बनाने में जुट गई है। अफस्पा वापसी का मुद्दा भाजपा-पीडीपी गठबंधन के एजेंडे में शुमार है। इसलिए पीडीपी इस मुद्दे को समन्वय समिति की बैठक में उठाना चाहती है।
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त्रिपुरा की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर में फैसला संभव नहीं है, लिहाजा इसे सबसे पहले गठबंधन के संयुक्त फोरम पर उठाया जाएगा। बाद में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद यह मसला केंद्र सरकार के साथ उठा सकते हैं।

यूनिफाइड कमांड की बैठक में मुख्यमंत्री सईद की ओर से यह मुद्दा उठाया गया था।  इसके बाद कठुआ में आतंकी हमले हुए। घाटी में पाकिस्तान के झंडे लहराए जाने की घटनाएं भी बढ़ीं।
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शोपियां और सोपोर में भी हमले हुए। इससे पीडीपी के तेवर नरम पड़े। मुफ्ती ने यह मुद्दा रक्षा मंत्री मनोहर परिकर के साथ नहीं उठाया। हालांकि त्रिपुरा के फैसले के बाद पीडीपी पर अपने कैडर से भी दबाव बढ़ रहा है।
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इन क्षेत्रों में लगा है अफस्पा

जम्मू कश्मीर में गवर्नर के आदेश से अतिरिक्त मुख्य सचिव ने 6 जुलाई 1990 को आदेश जारी कर अफस्पा के तहत अनंतनाग, बारामुला, बडगाम, कुपवाड़ा, पुलवामा, श्रीनगर और एलओसी के 20 किमी दायरे को अशांत क्षेत्र घोषित किया था।

10 अगस्त 2001 में जम्मू, कठुआ, उधमपुर, पुंछ, राजोरी, डोडा के लिए गृह विभाग के प्रमुख सचिव ने गवर्नर के आदेश से ऐसा ही आदेश निकाला।सीएम मुफ्ती सईद केंद्र के साथ करेंगे बात समन्वय समिति की बैठक में उठेगा मुद्दा

जम्मू-कश्मीर में हालात सुधरे हैं। इसकी झलक जमीन पर भी दिखनी चाहिए। इसलिए अफस्पा की आंशिक वापसी शुरू होनी चाहिए।
- महबूब बेग, मुख्य प्रवक्ता, पीडीपी
अभी जम्मू कश्मीर के हालात ऐसे नहीं हैं कि अफस्पा की वापसी के बारे में सोचना जाए। केंद्र सरकार इस पर फैसला लेगी। - जुगल किशोर, अध्यक्ष, भाजपा जेएंडके
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