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अफजल गुरु की फांसी के बहाने कांग्रेस की घेराबंदी

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क्षेत्रीय दलों ने चौथे चरण के चुनाव के लिए आक्रामक तेवर अपना लिया है। नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने कश्मीरी वोट बैंक को लुभाने के लिए अफजल गुरु की फांसी को चुनावी मुद्दा बनाया है। संसद पर हमले के आरोपी अफजल को फांसी दिए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस की घेराबंदी शुरू हो गई है।
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अफस्पा की वापसी का मुद्दा फिर से चुनावी एजेंडे में शुमार हो गया है। कश्मीरी युवकों पर दूसरे राज्यों में हो रहे हमले और निर्दोश कश्मीरियों की प्रताड़ना प्रचार के केंद्र में आ गया है। चौथे चरण में कश्मीर घाटी की 18 सीटों पर मतदान होना है।

नेकां और पीडीपी ने इसके लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इसी चरण के चुनाव से भाजपा भी कश्मीर में पैठ बनाने की जुगत में है। लिहाजा भाजपाई दिग्गजों ने रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू किया है। कश्मीरी दलों ने इस बार भाजपा से अधिक कांग्रेस पर हमले तेज किए हैं।
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पीडीपी और नेकां चौथे चरण में हुई आक्रामक

चौथे चरण के चुनाव में श्रीनगर, अनंतनाग और शोपियां जिले की सीटों पर मतदान होना है। अनंतनाग पीडीपी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र के पूर्व सांसद और नेकां नेता महबूब बेग ने पार्टी छोड़ दी है और अब वह पीडीपी के लिए काम कर रहे हैं। इससे नेकां को गहरा झटका लगा है।

डोरू की सीट कांग्रेस के पास है। कांग्रेस इस सीट को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। श्रीनगर में बाढ़ से तबाही सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। मतदाताओं में रियासत सरकार के खिलाफ गुस्सा है। इस कारण नेकां को अपना मजबूत किला बचाने के लिए खासी मेहनत करनी पड़ रही है।

सोनावार से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला चुनाव लड़ रहे हैं। उमर गांदरबल की पुरानी सीट छोड़ने के बाद वीरवाह और सोनावार दो स्थानों से चुनाव मैदान में उतरे। उमर को भी सोनावार में पीडीपी से कड़ी चुनौती मिल रही है।

निर्दोष कश्मीरी युवकों को फंसाए जाने का मुद्दा उठाया

चूंकि इस चरण की तमाम सीटें कश्मीर घाटी की है इसलिए पीडीपी और नेकां में एक-दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ तेज है। इस क्रम में अफस्पा की वापसी और निर्दोष कश्मीरी युवकों को फंसाए जाने का मुद्दा उठाया जा रहा है।

पीडीपी के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कांग्रेस को अफजल गुरु की फांसी के लिए जिम्मदार ठहराया और उमर की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। बकौल मुफ्ती कांग्रेस ने भाजपा का विस्तार रोकने के लिए अफजल गुरु को बलि का बकरा बनाया।

यह संप्रदायिकता माहौल बनाने की समानानन्तर कोशिश थी। मुफ्ती कहते हैं कि वह मुख्यमंत्री होते तो अफजल गुरु को फांसी नहीं होती। उन्होंने उमर पर आरोप लगाया कि उन्हें अफजल की फांसी की जानकारी थी लेकिन वह चुप रहे।
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अफस्पा उमर की देन

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला रियासत में अफस्पा लागू किए जाने के लिए पीडीपी को जिम्मेदार ठहराते हैं। उमर ने कहा कि पीडीपी के शासनकाल में ही यह कानून लागू हुआ जिसका खामियाजा कश्मीरियों को भुगतना पड़ रहा है।

उमर ने कांग्रेस पर भी हमले तेज किए हैं। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नेकां के कारण खाद्य सुरक्षा जैसा कानून रियासत में लागू नहीं हो पाया।

कांग्रेस ने जब रियासत सरकार की विफलता का ठीकरा उमर के सिर फोड़ा तो अब उमर के तेवर भी तल्ख हैं। उन्होंने कहा कि अगर विफलता के लिए नेकां को जिम्मेदार बताया जाता है तो उपलब्धियों का श्रेय भी अकेले नेकां को ही दिया जाना चाहिए।
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