सात मार्च को अपना पहला बजट पेश करेगी सरकार, बतौर वित्तीय, मुख्यमंत्री उमर पेश करेगा अपनी सरकार का पहला बजट
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में बदली व्यवस्था व सीमित संसाधनों के बीच बतौर वित्तीय मंत्री, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सरकार की अगले पांच वर्ष की प्राथमिकताओं को पटल पर रखेंगे। लोकलुभावने चुनावी वादों को पूरा कर लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस चुनावी वादों को पूरा करने के लिए बजट में प्रावधान करती है या नहीं इस पर मुख्य विपक्षी दल भाजपा के साथ-साथ पीडीपी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस की नजर रहेगी। मुख्यमंत्री उमर अपने बयानों में लगातार कहते आ रहे है कि जम्मू-कश्मीर का खजाना खाली है। उस खजाने से सरकार कैसे अपने वादों को पूरा करती है, देखना होगा। जम्मू विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. फलेंद्र सूदन कहते हैं कि मौजूदा व्यवस्था में उमर सरकार के लिए इन वादों को पूरा करना न मुमकिन है। इसके उन्हें यहां तो केंद्र की तरफ देखना होगा या फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई कर जैसी अन्य व्यवस्थाएं करनी होंगी, ताकि राजस्व जुटाया जाए। सरकार का बजट सत्र में क्या रुख होगा, इसे तय करने के लिए नेकां विधायक दल की बैठक रविवार को जम्मू में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर होगी।
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पीडीपी सहित अन्य दल नेकां को कसौटी पर उतरने के लिए तैयार
पीडीपी 370, सरकारी भूमि पर मालिकाना अधिकार देने जैसे विवादित मुद्दों को विधानसभा में उठाएगी। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने बजट सत्र से पहले उनके विधायकों की ओर से लाए जाने वाले निजी विधेयक पर मुख्यमंत्री सहित अन्य विपक्षी पार्टियों के समर्थन मांगा है। इसके लिए पत्र भी लिखा है, जो दर्शाता है पीडीपी अपने पारंपरिक वोट बैंक के सामने खुद को नेकां के विकल्प के रूप में पेश करेगी।