सियासत: विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सरकार को घेरने की तैयारी
-महबूबा बोलीं-जेलों में बंद कश्मीरी रिहा किए जाएं
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। विधानसभा सत्र की तैयारियों के बीच विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पीडीपी ने सोमवार को जेलों में बंद कश्मीरियों को रिहा करने और बाहर की जेलों में बंद कश्मीरी कैदियों को वापस लाने की मांग करते हुए पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें पीडीपी मुख्यालय के गेट पर ही रोक दिया।
इस दौरान धक्कामुक्की हुई और महबूबा खुद एक महिला पुलिसकर्मी को पीछे धकेलती दिखीं। इस पर पुलिस ने उन्हें बाहर खड़ी गाड़ी में बैठाने और हिरासत में लेने की कोशिश की तो पीडीपी कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने पुलिस और मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। काफी मशक्कत के बाद पुलिस महबूबा और कार्यकर्ताओं को वापस पीडीपी मुख्यालय के अंदर लाई। इस दौरान नारेबाजी होती रही। बाहर प्रदर्शन के दौरान और अंदर पत्रकारों को संबोधित कर पीडीपी अध्यक्ष ने जेलों में बंद निर्दोष कश्मीरियों को रिहा करने और बाहर की जेलों में बंद कश्मीरी कैदियों को वापस लाने की मांग की। महबूबा ने तल्ख लहजे में कहा कि बलात्कार के दोषी राम रहीम को बार-बार पैरोल मिल सकती है, लेकिन वह बदनसीब कश्मीरी जिनपर अभी आरोप भी सिद्ध नहीं हुआ उन्हें जमानत नहीं दी जा रही है।
कश्मीरी कैदियों को बाहर की जेलों में भेज दिया गया है, बीमारी के इलाज और पैरवी के लिए उनके गरीब परिजन वहां जा नहीं पा रहे हैं। मेरे पास आए दिन ऐसे मजलूम कश्मीरियों के परिजन आते हैं। वो अपनी मजबूरी बताते हैं, बच्चों को छुड़ाने की गुहार लगाते हैं।
तो पहलगाम पर हमला न होता
महबूबा ने कहा कि हम सिर्फ शांति के साथ मार्च निकालना चाहते थे। पूरी ताकत हमें रोकने में लगा दी गई है। इतनी ताकत पहलगाम में सुरक्षा पर लगाते तो आतंकी हमला न होता और न पाकिस्तान से जंग होती। मुख्यमंत्री उमर पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि आप चाहते तो कश्मीरी लोगों की परेशानी को केंद्र के सामने रख सकते थे, लेकिन आप खामोश हैं।
कैदियों की रिहाई का प्रयास सभी कश्मीरियों की जिम्मेदारी : मीरवाइज
श्रीनगर। मीरवाइज डॉ. मौलाना उमर फारूक ने सोमवार को कहा कि बेकसूर कैदियों की रिहाई का प्रयास सभी कश्मीरियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने एक्स पर कहा कि जम्मू-कश्मीर और पूरे भारत की जेलों में बंद हजारों कश्मीरी कैदियों की दुर्दशा को उजागर करना और उनकी राहत व रिहाई के लिए प्रयास करना सभी कश्मीरियों की नैतिक जिम्मेदारी है।
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पीडीपी दिल्ली जाकर गृह मंत्री के सामने मुद्दा उठाए
श्रीनगर। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर के बाहर की जेलों से कैदियों को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन पर सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विरोध प्रदर्शन में कुछ भी गलत नहीं है लेकिन सुरक्षा के मामलों पर फैसले दिल्ली में लिए जाते हैं। उन्होंने कहा, हम सभी इसे लेकर चिंतित हैं, लेकिन श्रीनगर में कुछ भी करने से कुछ नहीं हो सकता। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा संबंधी फैसले दिल्ली में, गृह मंत्रालय में लिए जाते हैं। इसलिए बेहतर यही होगा कि वह दिल्ली जाएं, गृह मंत्री से मिले और उनके सामने यह मुद्दा उठाएं, जैसे हमने उठाया।
सीएम ने कहा, उनकी सरकार ने यह मुद्दा केंद्रीय गृह मंत्री के सामने इसलिए रखा क्योंकि फैसला वहीं होना है। अगर वे (पीडीपी) सिर्फ दिखावे के लिए ऐसा कर रहे हैं तो उन्हें करने दीजिए। किसी को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी।