अनंतनाग में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चुनाव लोगों का अधिकार है। लेकिन इसके लिए वह केंद्र के सामने भीख नहीं मांगेंगे। अगर इस साल चुनाव नहीं होते हैं तो न हों। साथ ही उन्होंने कहा कि वीडीजी सदस्यों को बंदूकें देना अब सरकार की मजबूरी है और इससे जाहिर होता है कि प्रदेश के हालात पर सरकार का नियंत्रण नहीं है।
नेकां के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला अनुच्छेद 370 निरस्त करने की टिप्पणी पर जम्मू-कश्मीर भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि 1987 में नेकां द्वारा की गई धांधली के बाद बंदूक का जन्म हुआ। इससे घाटी में बंदूकें लाने वाले मोहम्मद यूसुफ उर्फ सैयद सलाहुद्दीन और यासीन मलिक जैसे आतंकी बुलाए गए।
ठाकुर ने कहा, नेकां की ओर से की गई हेराफेरी के कारण ही कश्मीरी युवकों ने बंदूक उठाई, जिससे बेकसूर नागरिक मारे गए। अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकवाद की घटनाएं कम हुई हैं और बंदूक का साया भी काफी हद तक कम हुआ है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद राहत की सांस ली और शांति का लाभ उठाया। जो लोग कश्मीर में बंदूकें थमाने के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें आतंकवाद से संबंधित घटनाओं और मारे गए आतंकवादियों के आंकड़ों को पढ़ना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जहां तक राजोरी के ढांगरी की घटना की बात है तो उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हताशा में ऐसी हरकतें की जाती हैं। उमर को यह महसूस करना चाहिए कि ‘अपनी रक्षा आप करो’ के नारे के तहत लोग वीडीजी सदस्य बनने, प्रशिक्षण प्राप्त करने और अपने क्षेत्रों की रक्षा करने के लिए तैयार हैं।