पीडीपी नेताओं की बैठक में पूर्व एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के शांति और सुलह के विजन को ही सही ठहराते हुए कहा है कि इसका कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि पांच अगस्त 2019 को घटी घटना जम्मू-कश्मीर के इतिहास का काला अध्याय है। भारत की संसद का जिस तरीके से दुरुपयोग करते हुए जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35-ए को हटाया गया और राज्य का दर्जा हटाकर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया, वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ धोखा था।
उन्होंने कहा पीडीपी जन आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में काम करती रहेगी और किसी भी तरह की धमकी और दबाब में नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों को सियासी फ्रॉड के जरिये जो सब्जबाग दिखाए गए उन्हें एक साल के बाद जमीनी स्थिति का पता चलने लगा है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का व्यापक विजन था कि क्षेत्रों, राज्य व देश के अलावा एलओसी के पार की समस्याओं को केवल बातचीत और सुलह से ही हल किया जा सकता हैं और उनके रोड मैप का कोई विकल्प ही नहीं हैं। पीडीसी इसी रोड मैप पर चलती रहेगी और जन आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में काम करेगी। इस अवसर पर पूर्व एमएलसी फिरदौस टाक ने कहा कि दिखावे के उपायों से नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्थिति को नहीं बदल सकता है।
उन्होंने कहा, पिछले एक साल से भाजपा सरकार ने जो कदम उठाए हैं उसका मकसद केवल जमीन पर कब्जा करना है न कि जन कल्याण है। उन्होंने सभी पार्टियों से एकजुट होकर जम्मू कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और विशेष दर्जे की सुरक्षा के लिए आगे आने की अपील की।