कश्मीर में अलगाववादियों के खिलाफ केंद्र सरकार के कसते शिकंजे से अब घाटी के पत्थरबाजों के हौंसले टूटने लगे हैं। कश्मीर में अलगाववादियों की पाकिस्तानी फंडिंग और कमाई के जरियों पर एनआईए की छापेमारी के बाद लगने लगी रोक से अब पत्थरबाजों की दिहाड़ी के साधनों का अंत होने लगा है।
गृह मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार कश्मीर में पत्थरबाजों को मिलने वाली दिहाड़ी को जिन लोगों के माध्यम से उन तक पहुंचाया जाता था उनमें से कई को अब पैसों की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। इसके साथ ही पिछले दिनों कारोबारियों पर छापेमारी कर चुकी एनआईए अब कई संदिग्ध बैंक खातों पर भी अपनी नजर गड़ाए हुए है।
अभी ये आधिकारिक रूप से नहीं कहा जा सकता कि अलगाववादियों के ठिकानों से कितनी अवैध संपत्ति की जानकारी मिली है, पर ये जरूर है कि इन संपत्तियों में ऐसे कई संदिग्ध लोगों और बैंक खातों की जानकारी मिली है जिनके माध्यम से घाटी में पत्थरबाजों को दिहाड़ी पहुंचाने का शक है।
अलगाववादियों को गिरफ्तारी के बाद नहीं मिला कश्मीरी आवाम का साथ
अलगाववादी नेता गिलानी
- फोटो : फाइल फोटो
हाल के दिनों में कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। बड़ी बात ये कि जिन अलगाववादियों की शह पर कश्मीर में हिंसा का खेल खेला जाता रहा है उनमें से रई गिरफ्तारी के बाद भी कश्मीर में पत्थरबाजों के प्रदर्शन करने की हिम्मत नहीं हुई। वजह ये कि कश्मीरी आवाम में से भी अलगाववादियों का तिलिस्म टूटने लगा है।
एक और बात ये कि ऑपरेशन ऑल आउट के दौरान भी कई बार आतंकी मुठभेड़ों में पत्थरबाजों की सक्रियता होने की कोशिशें की गईं लेकिन सुरक्षाबलों की मुस्तैदी के कारण हिंसा की घटनाओं के बीच भी आतंकियों का अंत किया गया।
हुक्मरानों पर कार्रवाई से टूटने लगी पत्थरबाजों की रीढ़
फाइल फोटो
कहा जा रहा है कि कश्मीर में अलगाववादियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई के कारण पत्थरबाजों की दिहाड़ी के नेटवर्क को भी कमजोर करने में मदद मिली है। फंडिंग के तमाम रास्ते बंद होने लगे तो कश्मीर में दहशत फैलाकर आम जनजीवन प्रभावित करने वालों की कमर भी टूटने लगी है। कश्मीर के हालातों को सुधारने में मदद मिल रही है और संभव है कि आगे घाटी के उन लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी जिनकी शह पर इतिहास में कश्मीर में हिंसा का कारोबार किया जा रहा था।