जम्मू कश्मीर राज्य के 731 थाने और पुलिस चौकियां मोबाइल नेटवर्क (क्लोज यूजर ग्रुप) से जोड़ने के बावजूद इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। थानों और चौकियों में पड़े उपकरण बंद ही पड़े हैं। हालांकि पुलिस के दूरसंचार विंग का प्रस्ताव है कि एक हजार थाने व चौकियां भी इसी साल एक दूसरे से जोड़ दी जाएं।
सीयूजी के तहत कोई भी पुलिस अधिकारी अब सीधे थानों में मोबाइल से भी बात कर सकता है, लेकिन इस सुविधा का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार थाना क्षेत्र में हजारों लोग आते हैं, लेकिन अभी तक आठ सौ थाने और चौकियां ही इस ग्रुप के साथ जोड़ी गई हैं।
अधिकारी नहीं कर पा रहे इस्तेमाल
इसके बावजूद अधिकारी इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। जिस कारण बाहर के किसी भी व्यक्ति, दुखी, पीड़ित या शिकायतकर्ता को फोन नहीं आ पाता है।
पुलिस अधिकारी भी ग्रुप से बाहर किसी से भी बात नहीं कर सकते हैं। बेशक यह सेवा फ्री है, इसके बावजूद अन्य जगहों पर फोन करने की जरूरत होती है तो अधिकारियों को अपनी जेब से रुपया देना पड़ता है।
दूर संचार विंग के आईजीपी हेमंत कुमार लोहिया का दावा है क्लोज यूजर ग्रुप मोबीलिटी में इस्तेमाल नहीं होंगे। कई बार थानों के लैंडलाइन से बात करने पर मोबाइल का बिल अधिक आता है।
एक हजार थानों को जोड़ने का प्रस्ताव है
एक हजार और थाने व चौकियों में सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इन एक हजार थानों के साथ में जुड़ने से यह समस्या भी हल हो जाएगी और अधिकारियों की शिकायत भी दूर हो जाएगी।
राज्य के 70 फीसदी इलाके मोबाइल नेटवर्क से इसी साल तक जोड़े जाने का प्रस्ताव है। रेलवे स्टेशन पर मौजूद जीआरपी थानों को भी इससे जोड़ा गया है। कुछ नए थाने और चौकियां भी हाल ही में तैयार हुई हैं।
जहां लैंड लाइन की सुविधा नहीं है, उन चौकियों और थानों में भी सीयूजी के साथ जोड़ा गया है और वह भी संपर्क में आ गए हैं। जब सभी थाने इस ग्रुप से जुड़ जाएंगे तो इसके इस्तेमाल करने के भी सख्त आदेश दिए जा सकते हैं।