बाढ़ में सेना के राहत कार्य के बाद सभी सेना और एनडीआरएफ की तारीफ कर रहे हैं जबकि स्थानीय पुलिस और प्रशासन की आलोचना की जा रही है। जबकि पुलिस एवं प्रशासन ने दावा किया कि केवल सेना ही राहत एवं बचाव कार्य में नहीं जुटी है। पुलिस और प्रशासन की टीमें शुरू से ही पंचैरी और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच गई थी। टीमों द्वारा लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है।
उधमपुर डोडा रेंज के डीआईजी गरीब दास और डीसी यशा मुद्गल ने पत्रकार वार्ता के दौरान मीडिया की कुछ खबरों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा बताया जा रहा है कि सद्दल, पंजर गांव में केवल सेना ही राहत कार्य कर रही है। पुलिस और जिला प्रशासन की कोई टीम रेसक्यू आपरेशन नहीं कर रही है। यह सही नहीं है। जिला प्रशासन के कहने पर ही सेना और एयरफोर्स ने बचाव कार्य शुरू किया है। क्षेत्र का लगातार दौरा किया जा रहा है।
जिलाधीश के अनुसार सोमवार को जिले के बाढ़ एवं भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया जा रहा है। पंजर, सद्दल, लोअर मीर, पंचैरी क्षेत्रों का दौरा करने और राहत सामग्री बांटने के बाद लौटी डीसी ने बताया। प्रभावित लोगों को कंबल, रसोई का सामान आदि सामान बांटा गया है। प्रशासन, पुलिस, सेना मिलकर काम कर रहे हैं। डीसी ने दावा कि कश्मीर से उधमपुर पहुंच रहे प्रवासी श्रमिकों के लिए जिला प्रशासन ने लंगर लगाया है। जिला प्रशासन ने आटा, चावल और सिलेंडर मुहैया कराए हैं। लंगर व्यवस्था स्थानीय लोग कर रहे हैं।
डीआईजी गरीब दास के अनुसार फिलहाल मिली रिपोर्ट के तहत सद्दल में 34 लोगों की मौत हो चुकी है और 28 अभी भी लापता हैं। भूस्खलन में दबे लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरीएफ, पुलिस के जवान जुटे हुए हैं। एयरफोर्स ने भी क्षेत्र में 15 के करीब उड़ानें भरी हैं। जिन लोगों के घर बुरी तरह दब गए हैं। उन्हें नई जगह बसाने की भी कोशिशें जारी हैं। मामला क्रेडिट लेने का नहीं है। सिर्फ इतना साफ करना है कि जिला प्रशासन भी पूरी तरह से सक्रिय है और प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद है।