कबाइलियों के पाकिस्तानी सेना की मदद से पीओके पर किए गए हमले के शनिवार को 69 वर्ष पूरे हो गए हैं । इस हमले से प्रभावित हुए पीओके रिफ्यूजियों की आखों में आज भी अपना सब कुछ गंवाने का दर्द साफ नजर आता है। 69 वर्ष से हजारों परिवार सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद के इंतजार में हैं, जो अभी तक मिली नहीं है।
शनिवार को हमले के दिन को काला दिवस के रूप में मनाया जा रहा है । इस मौके पर मारे गए हजारों शहीदों को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी जाएगी। पीओके रिफ्यूजियों की संस्था एसओएस इंटरनेशनल की तरफ से शनिवार को महेशपुरा चौक में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें सैकड़ों रिफ्यूजी काली पट्टियां बांध कर पहुंचेंगे और विस्थापन का अपना दर्द बया करेंगे।
इसके अलावा हमले में मारे गए शहीदों की याद में विशेष प्रार्थना भी की जाएगी। कार्यक्रम के दौरान रिफ्यूजियों के निशाने पर केंद्र व राज्य सरकार रहेगी। क्योंकि सरकार ने रिफ्यूजियों के साथ पुनर्वास को लेकर बहुत सारे वादे किए थे, लेकिन अभी तक सरकार ने पैकेज के तहत इन परिवारों को कुछ दिया नहीं है।
जब पाक कबाइलियों ने हजारों निर्दोषों को मारा था
पाकिस्तानी सेना की मदद से हुआ था हमला
- फोटो : pti
22 अक्तूबर 1947 को कबाइलियों ने पाकिस्तान की सेना की मदद से पाक अधिकृत कश्मीर के जिला मुजफ्फराबाद पर हमला किया था। इस हमले में हजारों बेगुनाह निहत्थे हिंदू व सिखों की निर्मम हत्या की गई। हमले में बच निकलने वाले लोगों को अपने पुश्तैनी घरों को सदा-सदा के लिए छोड़ना पड़ा था।
कबाइलियों के उस हमले का सिलसिला जिला मुजफ्फराबाद से शुरू होकर मीरपुर, कोटली, भिंबर, पुंछ, छंब, गिलगित और असक्रदु तक पहुंच गया। इन स्थानों पर भी कबाइलियों ने हजारों लोगों की हत्या की और हजारों को घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
पुनर्वास के लिए 25 लाख का पैकेज दे सरकार
सीएम और डिप्टी सीएम
- फोटो : Amar Ujala
पीओके रिफ्यूजियों की मांग है कि 1947 में मुजफ्फराबाद, मीरपुर, कोटली पर हुए हमले की जांच के लिए आयोग का गठन किया जाए। कबाइली हमले में मारे गए हजारों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की सूची तैयार कर उन्हें शहीद और स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाए।
शहीदों की याद में स्मारक बनाया जाए और हर रिफ्यूजी परिवार को पुनर्वास के लिए 25 लाख रुपये का पैकेज दिया जाए। सरकारी रिकार्ड में सबको रिफ्यूजी का दर्जा दिया जाए, क्योंकि सरकार आज तक इनको विस्थापित ही मान कर चल रही है। जबकि सभी रिफ्यूजी के दर्जे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 9600 रिफ्यूजी परिवारों का रजिस्ट्रेशन करवाया जाए।