अखनूर। जम्मू-कश्मीर के दौरे पर आए परिसीमन आयोग के सदस्य क्षेत्र के लोगों की राय पर विधानसभा सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया में सीमावर्ती अखनूर क्षेत्र के विभिन्न संगठन, राजनीति और सामाजिक संगठन लामबंद होना हो गए हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र के लोग अपने अधिकार के लिए पीछे नहीं हटेंगे।
भाजपा नेता और किसान एडवजरी बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष दलजीत सिंह ने बताया कि अखनूर को जिले के दर्जे के लिए क्षेत्र के लोगों का हक है। कई बार सरकार और जनप्रतिनिधियों को जिला का दर्जा देने के लिए अवगत कराया जा चुका है। जिला बनाने पर क्षेत्र के लोगों को रोजगार सहित अन्य सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने बताया कि अखनूर क्षेत्र में फल और जनसंख्या भी अधिक है, जिस पर जिले का दर्जा क्षेत्र के लोगों का हक है। हाईकमान ने आश्वासन भी दिया है। समाजसेवी और दुकानदार गौरव शर्मा ने बताया कि सीमावर्ती अखनूर क्षेत्र को जिले का दर्जा बहुत पहले मिल जाना चाहिए, मगर हमेशा ही अखनूर की उपेक्षा की गई। अखनूर के लोगों को जिले का दर्जा और विधानसभा सीट बढ़ोतरी के एक मंच में आकर परिसीमन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी तभी ही क्षेत्र के लोगों को अपना हक मिलेगा।
डॉ. गुफर अहमद ने बताया कि राज्य में साल 2026 पर सीटों की बढ़ोतरी की जानी थी, मगर परिसीमन आयोग द्वारा लोगों की राय प्रक्रिया में अखनूर को जिले का दर्जा मिलना चाहिए, जो अखनूर की भौगोलिक और जनसंख्या में अधिक है। लोगों को लाभ होगा। वकील घरम पाल गुप्ता ने बताया कि वर्तमान समय की मांग और भौगोलिक स्थिति पर अखनूर को जिला का दर्जा और विधानसभा सीट की बढ़ोतरी परिसीमन आयोग द्वारा करनी चाहिए। क्षेत्र लोगों की बहुत पुरानी और सही मांग है।
अलग विधान सभा के लिए परिसीमन आयोग की टीम को सौंपा ज्ञापन
अरनिया। अरनिया को अलग विधान सभा बनाने की मांग को लेकर परिसीमन आयोग की टीम को जम्मू में ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में बॉर्डर संघर्ष समिति ने बार्डर क्षेत्र की समस्याओं को उजागर किया। ज्ञापन सौंपने वालों में सरपंच कूल पचेल सुभाष सैनी, चंगिया के पूर्व सरपंच व मौजूदा पंच डॉक्टर रघुवीर सिंह, तरेवा की सरपंच बलबीर कौर, पार्षद यश बुड्ढा व कल्याना गांव के वरिष्ठ नागरिक सूरत सिंह शामिल रहे। संवाद