देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में गुरुवार को कश्मीर की कई शख्सियतों का नाम लिया। इनमें भारत माता के कई वीर सपूतों की चर्चा भी उन्होंने की। साथ ही एक नाम ऐसा भी था जिनकी वजह से पाक को 1965 में हुए युद्ध के दौरान मुंह की खानी पड़ी। उनका नाम है मौलवी गुलामदीन। 1965 के युद्ध को वैसे तो कई मायनों में विशेष रूप से याद किया जाता है। इसी युद्ध में देश के लाल परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद ने शौर्य और पराक्रम की ऐसी पारी खेली जिससे पाक की नापाक हरकतों को दुनिया जान गई।
आज हम बात कर रहे हैं देश के उस लाल की जिन्होंने अपनी सूझबूझ से पाक की नापाक हरकतों को उजागर किया। 1965 में भारत-पाक के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी। मौकापरस्त पाक घुसपैठिए कश्मीर में घुसने की फिराक में जुट गए। इस दौरान वह ऐसे स्थानों ने घुसपैठ की फिराक में थे जहां से भारतीय सेना की ज्यादा चौकसी या तैनाती न थी।
इस दौरान उन्होंने एक ऐसे स्थान को चुना जहां से सेना काफी दूर थी। इसी दौरान मौलवी गुलामदीन की नजर इन घुसपैठियों पर पड़ती है। नापाक हरकत को भांपते हुए मौलवी गुलामदीन ने सेना के अफसरों को तुरंत इस बारे में सूचित किया। इसी सूचना के बाद भारत माता के सपूतों ने घुसपैठियों को खदेड़ दिया।
वहीं 1965 में राजौरी में फसाद के दौरान भी गुलामदीन की सूचना के बाद घुसपैठियों को इस जगह से मार भगाया गया था। इसके बाद से राजौरी में हर साल राजौरी दिवस मनाया जाता है। साथ ही इस मौके पर अशोक चक्र विजेता मौलवी गुलामदीन को भी याद किया जाता है। गुरुवार की रात 8 बजे जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे तो वह मौलवी गुलामदीन का नाम लेना न भूल पाए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कश्मीर के लोगों की बहादुरी को भी सराहा।