जम्मू यूनिवर्सिटी में हॉकी खेलते खिलाड़ी
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खेल ढांचे के विकास की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली प्रदेश सरकार के दावे और वादे खोखले नजर आ रहे हैं। इस बात का सुबूत युवा सेवाएं एवं खेल विभाग की ओर से करवाई जा रही अंतर जिला हॉकी प्रतियोगिता से मिल रहा है। जम्मू में एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड नहीं होने से प्रतियोगिता जम्मू यूनिवर्सिटी के घास भरे मैदान पर करवाई जा रही है, जो हॉकी खेल के नियमों के खिलाफ है। मैदान में अधिक घास होने से खिलाड़ी इसमें फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।
सवाल यह भी है कि घास भरे मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ी अन्य राज्यों के खिलाड़ियों का कैसे मुकाबला कर सकेंगे। जम्मू संभाग में एकमात्र एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान केके हक्कू स्टेडियम है। स्टेडियम में नए सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ बिछाने का काम चल रहा है, जिसके कारण वहां पर मुकाबले नहीं हो पा रहे। युवा सेवाएं एवं खेल विभाग व स्पोर्ट्स काउंसिल के पास जम्मू में इसके अलावा अन्य कोई ऐसा मैदान नहीं है, जहां हॉकी के मुकाबले करवाए जा सकें।
जम्मू यूनिवर्सिटी का मैदान हॉकी मुकाबलों के अनुरूप नहीं है, घास अधिक होने के साथ खेलते समय मिट्टी निकल जाती है। घास अधिक होने के कारण बॉल इसमें फंस जाती है, जिससे उसकी रफ्तार कम हो जाती है। युवा सेवाएं एवं खेल विभाग खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय सुविधा देने की बात करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर खेल सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं।
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प्रतियोगिता में आठ जिलों से 300 खिलाड़ी दिखा रहे दम
युवा सेवाएं एवं खेल विभाग जम्मू यूनिवर्सिटी के ग्राउंड में अंतर जिला हॉकी प्रतियोगिता करवा रहा है। इसमें ब्वॉयज अंडर-17 और 19 वर्ग में मुकाबले करवाए जा रहे हैं। प्रतियोगिता में आठ जिलों से 300 प्रतिभागी पहुंचे हैं। इस प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अगले स्तर की प्रतियोगिता के लिए चुना जाना है।