मंदिरों के शहर में कुकुरमुत्ते की तरह खुली शराब की दुकानें और बार का मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है। दो वकीलों और एक लॉ स्टूडेंट की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि नियमों को ताक में रखकर मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और नेशनल हाईवे पर शराब की दुकानें खोलने के लाइसेंस प्रदान किए गए हैं।
हाईकोर्ट के जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे और जस्टिस बीएस वालिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें सुनने के बाद आयुक्त सचिव कामर्शियल टैक्स, एक्साइज कमिश्नर जम्मू, डिप्टी एक्साइज कमिश्नर और अन्य को नोटिस जारी किया है। शराब और बार के लाइसेंस किस आधार पर दिए गए, इसका जवाब एक सप्ताह के अंदर दिया जाए।
एडवोकेट सुहासनी वशिष्ठ, दीपा शर्मा और लॉ स्टूडेंट शशांक वशिष्ठ ने याचिका में कहा कि सार्वजनिक और प्रतिबंधित स्थानों पर शराब की दुकानें और बार खुलने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जम्मू संभाग में 220 शराब की दुकानें और 109 बार चल रहे हैं, जबकि कश्मीर में तीन दुकानें और दो बार हैं। लद्दाख में दो शराब की दुकानें और 20 बार हैं। एक्साइज विभाग इसके बावजूद जम्मू संभाग में नए लाइसेंस जारी कर रहा है।
10 मार्च, 2015 को प्रतिवादी से एक प्रतिनिधिमंडल मिला और त्रिकुटा नगर में खुली एक नई शराब की दुकान का हवाला देते हुए नए लाइसेंस पर रोक लगाने की मांग की। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार कुंजवानी से नरवाल क्षेत्र में चार बार लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया जारी है। इस क्षेत्र में तीन शराब दुकानें और चार बार पहले से हैं, जबकि अथारिटी ने इस पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस जवाब नहीं दिया।