1990 के दशक में घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आधारित फिल्म शिकारा रिलीज से पहले ही विवाद में घिरती जा रही है। फिल्म की रिलीज रोकने के लिए कश्मीर के तीन लोगों ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म में जो तथ्य दिखाए गए हैं, हकीकत से उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषक मिसगर इफ्तिखार, कश्मीरी पत्रकार माजिद हैदरी और एक स्थानीय वकील इरफान हफीज लोन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि फिल्म का ट्रेलर देखने से पता चलता है कि इसमें कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन के लिए कश्मीरी मुसलमानों को जिम्मेदार बताया गया है। सच्चाई यह नहीं है। इस फिल्म के जरिये दो समुदायों में नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है।
मिसगर इफ्तिखार का कहना है कि हमने कई बार इस फिल्म के ट्रेलर देखे और और पाया कि उसमे दिखाए गए कंटेंट आपत्तिजनक हैं। फिल्म रिलीज करने का समय भी सही नहीं है।
दरअसल, अनुच्छेद 370 और 35ए हटने के बाद सरकार द्वारा हालात बिगड़ने से रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदियों के साथ साथ अन्य कई तरह के प्रयास किए गए हैं। इस समय पूरे मुल्क में सीएए और एनआरसी का मसला चल रहा है। ऐसे में इस फिल्म की रिलीज से माहौल खराब होगा।