श्रीनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 7 नवंबर की प्रस्तावित रैली को भाजपा अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है। इसके कई कारण हैं। एक तो इसी दिन अलगाववादियों ने मिलियन रैली का एलान किया है।
दूसरा रियासत में सरकार बनने के बाद पीडीपी-भाजपा की यह पहली संयुक्त रैली है। ऐसे में भीड़ जुटाने तथा अलगाववादियों की काट के लिए भाजपा ने पीपुल्स कांफ्रेंस को मैदान में उतारा है।
पीपुल्स कांफ्रेंस से मंत्री सज्जाद लोन की हंदवाड़ा तथा आसपास के क्षेत्रों में अच्छे खासे प्रभाव का पार्टी भरपूर लाभ लेने की तैयारी में है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव रियासत के मंत्रियों, विधायकों तथा टीम के साथ रैली की सफलता में पिछले दो दिनों से जुटे हुए हैं तो पीडीपी की ओर से स्वयं मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद इसकी निगरानी कर रहे हैं।
भाजपा ने रैली में भीड़ जुटाने के लिए पीपुल्स कांफ्रेंस को भी साथ लिया है। सूत्रों का कहना है कि पीडीपी-भाजपा की ओर से अलग-अलग बैठकें कर भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत भाजपा अपने दमखम पर भीड़ जुटाने के लिए पीपुल्स कांफ्रेंस को भी साथ लेकर चल रही है।