दिवाली पर सरहदी गांवों के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर गोलाबारी करने की आशंका के चलते सीमावर्ती गांवों के ज्यादातर लोगों ने इस बार रोशनी का पर्व राहत शिविरों और रिश्तेदारों के घरों पर ही मनाया। घरों से दूर रहकर दिवाली मनाने का मलाल लोगों को जरूर रहा, लेकिन त्योहार की खुशियां एक-दूसरे से पूरे जोश और उल्लास से साझा की गईं।
प्रशासन की ओर से कई राहत शिविरों में बच्चों को मिठाई और पटाखे वितरण कर लोगों के चेहरों पर खुशी लाने का प्रयास किया गया। सांबा सेक्टर के सरहद से सटे गांव रिगाल के लोगों ने धार्मिक स्थल तरेली में बने राहत शिविर में दिवाली का पर्व एक साथ मिलकर मनाया।
इस अवसर पर कांता देवी ने कहा कि पाकिस्तान पिछले कई साल से दिवाली के आसपास गोलाबारी शुरू कर देता है। घरों में बच्चों के साथ रहना खतरनाक है। ऐसे में लोगों को मजबूरी में राहत शिविरों या रिश्तेदारों के घरों में शरण लेनी पड़ी है।